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India Daily

म्यांमार में भूकंप से अस्पताल में कांप रहे थे बच्चे, हिल रही थी बिल्डिंग, दो नर्सों ने फर्ज के लिए लगाई जान की बाजी

म्यांमार में शुक्रवार को 7.7 तीव्रता का भूकंप आया जिसमें करीब 2000 लोगों की जान चली गई. इस भीषण भूकंप में करीब 3,400 से अधिक घायल हो गए हैं. इस प्राकृतिक आपदा के झटके भारत, थाईलैंड, चीन, वियतनाम और बांग्लादेश तक महसूस किए गए.

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Edited By: Garima Singh
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Courtesy: x

Myanmar Earthquake: म्यांमार में शुक्रवार को 7.7 तीव्रता का भूकंप आया जिसमें करीब 2000 लोगों की जान चली गई. इस भीषण भूकंप में करीब 3,400 से अधिक घायल हो गए हैं. इस प्राकृतिक आपदा के झटके भारत, थाईलैंड, चीन, वियतनाम और बांग्लादेश तक महसूस किए गए.

तबाही के बीच, चीन के युन्नान प्रांत के एक अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड का सीसीटीवी फुटेज वायरल हो रहा है. इसमें दो नर्सें भूकंप के दौरान नवजात बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगाती दिख रही हैं. 

नर्सों की बहादुरी का वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो में भूकंप के भयानक झटके साफ नजर आते हैं. अस्पताल का मेटरनिटी वार्ड कांप रहा था, और नवजातों के पालने लुढ़कने लगे. वीडियो में दिख रहा है एक नर्स तुरंत एक बच्चे को गोद में उठाकर फर्श पर बैठ गई, जबकि दूसरी नर्स ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पालनों को पकड़ लिया ताकि बच्चे नीचे न गिर जाए. उनकी इस साहसिक कोशिश ने दुनिया का ध्यान खींचा है. 

जान जोखिम में डालकर बच्चों की रक्षा

भूकंप इतना तेज था कि फर्श पर रखा पानी का फिल्टर जोर-जोर से हिलने लगा और पानी पूरे वार्ड में फैल गया. गीली जमीन पर नर्सों को संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था. एक नर्स भूकंप के झटकों से फर्श पर घसीटती दिखी, लेकिन उसने बच्चे को कसकर थामे रखा. अपने दूसरे हाथ से उसने पालनों को आपस में टकराने से रोक रखा था. इस घटना का वीडियो देखकर एक्स यूजर्स नर्सों की तारीफ करते नहीं थक रहे. 

म्यांमार में तबाही, भारत की मदद

म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र के उत्तर-पश्चिम में दोपहर 12:50 बजे (स्थानीय समय) आए इस भूकंप ने भारी नुकसान पहुंचाया. इमारतें ढह गईं, सड़कें टूट गईं और हजारों लोग मलबे में फंस गए. थाईलैंड में भी इसका असर दिखा, जहां बैंकॉक में ढही इमारत से मजदूरों को बचाने के लिए टीमें जुटी हैं. भारत ने म्यांमार की सहायता के लिए "ऑपरेशन ब्रह्मा" शुरू किया, जिसके तहत 15 टन राहत सामग्री भेजी गई, जिसमें भोजन और दवाइयां शामिल हैं.