BJP से क्यों नाराज है RSS, क्या अब टूटेगा दशकों पुराना रिश्ता?

लोकसभा चुनाव 2024 ने साफ कर दिया है RSS और BJP के बीच सब ठीक नहीं है. बीजेपी नेताओं ने संघ से दूरी बनाई, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनावों के नतीजों में नजर आया. ऐसी जमीन दरकी कि यूपी जैसे राज्य में बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी हो गई और हिंदुत्व की राजनीति से बचने वाली सपा नंबर वन की पार्टी हो गई. यह कैसे हुआ, इसकी कई वजहें सामने आ रही हैं. आइए जानते हैं संघ-बीजेपी की अनबन पर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं.

Abhishek Shukla


भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लोकसभा चुनाव 2024 में जिस सफलता की उम्मीद थी, वह नहीं मिली. बीजेपी 240 सीटों पर सिमट गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिजाज के लिए सीटों का यह आंकड़ा ठीक नहीं है. अभी तक उनके पास पूर्ण बहुमत रहा है, इस बार उन्हें गठबंधन धर्म निभाना है.

जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की नाराजगी बीजेपी को भारी पड़ी है.बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लोकसभा चुनावों के बीच दावा किया था कि बीजेपी अब खुद सक्षम है और उसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की जरूरत नहीं है. संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान अब चर्चा में हैं.

संघ ने तब भी आगाह किया था कि किसी एक चेहरे पर निर्भरता, पार्टी को कमजोर करती है. अब संघ प्रमुख ने भी कह दिया है काम करे पर इसका अहंकार ना पाले, वह सही सेवक है. उनके बयानों को लेकर अटकलें लगाई गईं कि संघ और बीजेपी के बीच सब ठीक नहीं है.

RSS के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में संघ कार्यकर्ता रतन शारदा ने लिखा है कि साल 2024 के आम चुनाव के नतीजे अति आत्मविश्वासी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक वास्तविकता के रूप में सामने आए हैं.  उन्हें एहसास नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 400 पार की अपील उनके लिए एक लक्ष्य और विपक्ष को चुनौती देने जैसा था.