Union Budget: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले महीने यानी जुलाई में केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं. आपके दिमाग में ये सवाल जरूर उठ रहा होगा कि बजट तो 1 फरवरी को पेश किया गया था फिर जुलाई में दोबारा बजट क्यों पेश किया जा रहा है? इस सवाल का जवाब भी आपको दिया जाएगा लेकन पहले यह जान लीजिए कि बजट को लेकर वित्त मंत्रालय में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं, हालांकि अभी तक बजट पेश करने की तारीख का ऐलान नहीं किया गया है.
निर्मला सीतारमण रचेंगी इतिहास
बजट पेश करने के साथ ही निर्मला सीतारमण इतिहास रचने जा रही हैं. सीतारमण लगातार सात बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी. इससे पहले बतौर वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 1959 से 1964 के बीच 5 बार फाइनल और एक बार अंतरिम बजट पेश किया था. सीतारमण से पहले मनमोहन सिंह, अरुण जेटली, पी चिदंबरम, यशवंत सिन्हा भी 5 बार बजट पेश कर चुके हैं.
क्यों पेश किए जा रहे हैं दो बजट
इस साल दो बजट पेश किये जा रहे हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि मौजूदा सरकार आम चुनाव से पहले पूर्ण बजट पेश नहीं कर सकती. इसलिए अब चुनाव होने के बाद पूर्ण बजट पेश किया जाएगा.
अंतरिम बजट- 1 फरवरी को पेश हुआ बजट अंतरिम बजट था अंतरिम बजट केवल वोट-ऑन-अकाउंट होता है. अंतरिम बजट में सरकार केवल अपने खर्चे बताती है. अंतरिम बजट को बिना औपचारिक चर्चा के संसद में पास किया जा सकता है.
वोट-ऑन-अकाउंट को संसद से अनुमति मिलने के बाद सरकार अप्रैल से जुलाई के बीच अपने विभिन्न खर्चों के लिए भारत सरकार के फंड से पैसे निकाल सकती है.
यानी अंतरिम बजट मौजूदा सरकार को नई सरकार बनने तक अपने विभिन्न खर्चों के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है.
अंतरिम बजट में सरकार किसी नई योजना का ऐलान नहीं कर सकती. इस बजट में सरकार केवल अपने राजस्व और खर्चों के बारे में बताती है.
चुनाव आयोग की आचार संहिता के मुताबिक अंतरिम बजट में सरकार किसी बड़ी योजना का ऐलान नहीं कर सकती. ऐसा इसलिए क्योंकि योजनाओं का ऐलान चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है.
इसके अलावा सरकार को अंतरिम बजट में आर्थिक सर्वे पेश करने की भी अनुमति नहीं होती. हालांकि सरकार तात्कालिक आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरिम बजट में कोई भी फैसला ले सकती है.
पूर्ण बजट
नई सरकार बनने के बाद अब पूर्ण बजट पेश किया जाएगा. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार यूनियन बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण कहा जाता है.
पूर्ण बजट में सरकार अगले वित्त वर्ष में विभिन्न योजनाओं पर होने वाले खर्च और सरकार को विभिन्न स्रोतों से होने वाली आय का खाका पेश करती है.
इसके अलावा पूर्ण बजट के दौरान नई योजनाओं का ऐलान भी किया जाता है. पूर्ण बजट पेश होने के बाद इस पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा की जाती है. पूर्ण बजट की मियाद 31 मार्च तक होती है.
इस बार पूर्ण बजट में क्या मिलेगी सौगात
महंगाई और बेरोजारी- इस बार लोकसभा के चुनाव में महंगाई और बेरोजारी बड़े मुद्दे रहे. बजट में महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर बड़ी घोषणाएं होने की उम्मीद है.
इंफ्रास्ट्रक्चर- मोदी सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काफी जोर रहा है. इस बार भी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े ऐलान किए जा सकते हैं.
ग्रीन एनर्जी- ग्रीन एनर्जी मोदी सरकार के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा है. बजट में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फंड जारी किया जा सकता है.
डिफेंस- बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं को देखते हुए मोदी सरकार डिफेंस को लेकर भी बड़ी घोषणाएं कर सकती है.