Budget 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का अंतरिम बजट 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सदन में पेश किया जाएगा. बजट आने के बाद बहुत से लोगों को समझ में नहीं आता है उसके पीछे की वजह उनसे प्रयोग होने वाले कुछ शब्द होते हैं. जिनको जाने बिना बजट को समझना बहुत मुश्किल होता है. इन्हीं शब्दों को आपको हम सरल भाषा में समझाने की कोशिश कर रहे हैं.
बजट की उत्पत्ति
बजट को समझना काफी कठिन होता है. इस कठिनाई की वजह कुछ और नहीं बल्कि इसमें प्रयोग होने वाले टर्म है. जिसको जानने के बाद बजट को बड़े आराम से समझा जा सकता है.
बजट शब्द फ्रैंच भाषा के शब्द बोजेत (Bougette) से बना है. जिसका अर्ध छोटा बैग होता है. जबकि लैटिन शब्द बुल्गा को भी इससे जोड़ते हैं जिसका मतलब चमड़े का थैला होता है. पहले के समय में बड़े व्यापारी अपना सारे महत्वपूर्ण दस्तावेज और मौद्रिक दस्तावेज थैले में ही रखते हैं. इसी उनका सभी हिसाब-किताब से जुड़ा सामान भी रखा जाता है.
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकारी खजाने के साल भर के आय-व्यय का लेखा जोखा बनाने के लिए बजट की शुरुआत हुई. इसकी शुरुआत सबसे पहले ब्रिटेन में हुई थी. जहां के वित्त मंत्री संसद में आय-व्यय का लेखा जोखा पेश करने के लिए सभी दस्तावेज और कागज एक लाल बैग में रखकर लाते थे. उसी बैग को बजट कहा गया.
सरकारी राजस्व व व्यय (Government Eevenue and Expenditure)
सरकार की वित्तीय नीति का ये एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसमें सरकार के सभी आय और व्यय का स्त्रोत दिखाया जाता है. इससे जुड़े मद से सरकार को होने वाले लाभ और खर्च की जानकारी मिलती है.
बजट आकलन (Budget Estimation)
सदन में वित्त मंत्री द्वारा बजट प्रस्ताव रखने के दौरान विभिन्न तरह के कर और शुल्क (Tax) के माध्यम से होने वाली आमदनी और योजनाओं के साथ अन्य खर्चों का लेखा पेश करती हैं. इसे बजट आकलन कहा जाता है.
वित्त विधेयक (Finance Bill)
इस बिल के माध्यम से वित्त मंत्री आम बजट में सरकारी आमदनी के विचार को नए टैक्सों के साथ प्रस्ताव करते हैं. वहीं फाइनेंस बिल में मौजूद टैक्स सिस्टम में नए संशोधन आदि को प्रस्तावित किया जाता है. ये संसद में मंजूरी मिलने के साथ ही लागू हो जाता है.
राजस्व सरप्लस (Revenue Surplus)
सरकार को होने वाले राजस्व की प्राप्ति अगर राजस्व खर्च से अधिक होती है तो उस स्थिति में राजस्व सरप्लस में होता है.
विनियोग बिल (Appropriation Bill)
इस बिल का मतलब ये हैं कि सरकार के तमाम उपायों के बावजूद सरकारी खर्च पूरा नहीं हो पाता है. जिसके लिए सरकार अपने संचित निधि से धन की आवश्वता है. इसकी पूर्ति के लिए वित्त मंत्री इस बिल के माध्यम से संसद में संचित निधि से धन निकालने की अनुमित मांगने हैं.
पूंजी बजट (Capital Budgeting)
सदन में वित्त मंत्री बजट पेश करने के दौरान सरकारी आमदनी का ब्योरा पेश करती हैं. जिसमें सरकार द्वारा रिजर्व बैंक और विदेशी बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज, ट्रेजरी चालानों की बिक्री से होने वाली आय हिसाब-किताब है. इसके साथ ही पूर्व में राज्यों को दिए गए कर्जों को वापस लेने में आए घन का पूरा व्योरा भी इसमें दिया जाता है.
संशोधित आकलन (Revised Estimate)
बजट के खर्चों का वास्तविक खर्च और पूर्वानुमान खर्च के बीच अंतर का पूरा लेखा जोखा होता है.
पूंजी भुगतान (Capital Payment)
सरकार द्वारा किसी भी संपत्ति की खरीद के लिए होना भुगतान इस श्रेणी में आता है. इसमें केंद्र सरकार द्वारा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक उपक्रमों को दिए जाने वाले कर्ज और अग्रिम राशि भी पूंजी भुगतान के अंतर्गत आता है.
अनुदान मांग (Demand for Grants)
सरकार के संचित कोष से मांगे गए धन (मुद्रा) के खर्चों का अनुमानित लेखा-जोखा ही अनुदान मांग है.
योजना खर्चा (Planning Expenses)
केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाने वाले खर्च को ही योजना खर्च कहते हैं.