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India Daily

संभल की शाही जामा मस्जिद की अब नहीं होगी रंगाई-पुताई, हाईकोर्ट ने दिया सिर्फ सफाई का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल मस्जिद में स्वच्छता कार्य के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की देखरेख में सफाई कराने की अनुमति प्रदान की है. हालांकि, न्यायालय ने मस्जिद की रंगाई और पुताई के लिए अभी तक कोई अनुमति नहीं दी है.

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Edited By: Ritu Sharma
Sambhal Masjid
Courtesy: Social Media

Sambhal Masjid: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाही जामा मस्जिद, संभल में सफेदी और मरम्मत कार्य को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर कहा कि मस्जिद की दीवारें पहले से इनेमल पेंट से कवर हैं और उनकी हालत ठीक है, इसलिए फिलहाल सफेदी की जरूरत नहीं है. हालांकि, अदालत ने मस्जिद परिसर की सफाई कराने के निर्देश दिए हैं.

इसको लेकर मस्जिद प्रबंधन समिति का कहना है कि ASI की रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत है और सफेदी जरूरी है. इस पर न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने समिति को मंगलवार तक अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया है.

हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने पेश की रिपोर्ट

आपको बता दें कि गुरुवार को हाईकोर्ट ने ASI को निर्देश दिया था कि वह रमजान से पहले मस्जिद का निरीक्षण करे और यह आकलन करे कि सफेदी या अन्य रखरखाव कार्य की जरूरत है या नहीं. इस रिपोर्ट में कहा गया कि मस्जिद पर पहले से ही इनेमल पेंट चढ़ा हुआ है, जो अभी भी ठीक हालत में है, इसलिए फिलहाल सफेदी आवश्यक नहीं है. हालांकि, अदालत ने मस्जिद के भीतर और आसपास की सफाई के निर्देश दिए हैं. इसमें धूल और वनस्पति हटाने का कार्य किया जाएगा.

मस्जिद समिति और ASI आमने-सामने

वहीं मस्जिद प्रबंधन समिति ने तर्क दिया कि रमजान से पहले सफेदी, मरम्मत और रोशनी की व्यवस्था जरूरी है, ताकि नमाजियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. समिति का दावा है कि इससे पहले हर साल बिना किसी रुकावट के ये कार्य किए जाते रहे हैं और ASI ने कभी आपत्ति नहीं जताई. दूसरी ओर, ASI का कहना है कि मस्जिद एक संरक्षित स्मारक है और कोई भी बदलाव करने के लिए पहले ASI की अनुमति लेना अनिवार्य है.

पुलिस ने भी जताई आपत्ति

बताते चले कि समिति ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) संभल से मस्जिद के मरम्मत कार्य की अनुमति मांगी थी, लेकिन 11 फरवरी, 2025 को ASP ने जवाब में कहा कि चूंकि यह संरक्षित स्मारक है, इसलिए बिना ASI की अनुमति के कोई कार्य नहीं किया जा सकता.

कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर हुई समिति

वहीं ASI और पुलिस की आपत्तियों को देखते हुए मस्जिद प्रबंधन समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सफेदी और मरम्मत कार्य पर लगी रोक को हटाने की मांग की थी. उनका कहना है कि रमजान के दौरान हर साल मस्जिद में सफेदी और सफाई का कार्य किया जाता रहा है और यह मस्जिद के नियमित रखरखाव का हिस्सा है.

आगे क्या होगा?

बहरहाल, अब मंगलवार तक मस्जिद समिति अपनी आपत्ति दर्ज करा सकती है, जिसके बाद कोर्ट अगला फैसला लेगी. फिलहाल, ASI के आदेश के मुताबिक सफेदी नहीं होगी, लेकिन सफाई की अनुमति मिल गई है.