उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ईद के चाँद का दीदार हो गया है, जिससे यह पुष्टि हो गई है कि 31 मार्च 2025, सोमवार को ईद-उल-फित्र मनाई जाएगी. रमजान के महीने का समापन होते ही शहर भर में मुसलमानों में ईद की खुशियां और उल्लास का माहौल है. बता दें कि, यह खास दिन उनके लिए दुआओं, आभार और खुशी के मिलन का पल होगा.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शाव्वाल के चाँद का दीदार रमजान के उपवास से ईद के उल्लास में बदलाव का प्रतीक है. यह पल हर साल लाखों मुसलमानों द्वारा बड़ी उम्मीद और इंतजार के साथ देखा जाता है. जैसे ही नए चाँद का टुकड़ा आसमान में दिखाई दिया, खुशी और उत्तेजना की लहर पूरे शहर में फैल गई. मस्जिदों, मीडिया और सोशल नेटवर्क्स के जरिए यह खबर चारों ओर फैल गई.
जानिए क्या होता है ईद-उल-फितर?
ईद-उल-फित्र, जिसे 'उपवास तोड़ने का त्योहार' भी कहा जाता है, एक समय होता है जब मुसलमान आध्यात्मिक विचार, उदारता और सामूहिक भाईचारे की भावना के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं.
ईद की विशेष नमाज और ज़कात-उल-फितर का महत्व
ईद का दिन विशेष ईद नमाज से शुरू होता है, जिसमें परिवार और दोस्त मिलकर रमजान की दुआओं और आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं. इस दिन ज़कात-उल-फित्र भी दिया जाता है, जो उन लोगों तक मदद पहुंचाने का अवसर है, जो समाज में जरूरतमंद हैं. यह सुनिश्चित करता है कि हर कोई इस त्योहार में भाग ले सके और कोई भी भूखा न रहे.
लखनऊ में ईद की मची धूम
ईद की खुशी एक शानदार भोज के बिना अधूरी रहती है, और लखनऊ इस मामले में पीछे नहीं है. यहां के घरों में बिरयानी, कबाब, सेवइं और शीर खुरमा जैसी लजीज व्यंजनों की महक फैली हुई है. इसके अलावा, लखनऊ के बाजारों और शॉपिंग जिलों में उत्सव का माहौल है, जहां लोग अंतिम समय में ईद के कपड़े, गिफ्ट और मिठाइयां खरीद रहे हैं.
ईद की भावना: प्रेम, एकता और करुणा का प्रतीक
जैसे-जैसे 31 मार्च को ईद के आयोजन की तैयारी हो रही है, लखनऊ और पूरे भारत में ईद की भावना प्रेम, एकता और करुणा को फैलाने का एक अहम अवसर बनती है. यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि सच्ची खुशी और समृद्धि साझा करने से आती है. चाहे वो अच्छे कामों के माध्यम से हो, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताकर, या स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेकर, ईद-उल-फित्र रिश्तों को मज़बूत करने और खुशियां फैलाने का दिन है.