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'उत्तराखंड का नाम भी यूपी-2 कर दीजिए', अखिलेश ने उत्तराखंड में कई जगहों का नाम लेने पर CM धामी पर कसा तंज

Uttarakhand Name Change: उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा स्थानों के नाम बदलने के निर्णय पर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया है, जो राजनीतिक चर्चाओं का नया विषय बन गया है.

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Edited By: Ritu Sharma
Akhilesh yadav
Courtesy: Social Media

Uttarakhand Name Change: उत्तराखंड में चार जिलों के 11 स्थानों के नाम बदलने के फैसले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर नाम ही बदलने हैं, तो राज्य का नाम 'उत्तर प्रदेश-2' कर देना चाहिए.

धामी सरकार ने नाम बदलने को बताया सांस्कृतिक सम्मान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधम सिंह नगर के विभिन्न स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय संस्कृति और ऐतिहासिक हस्तियों को सम्मान देने के उद्देश्य से उठाया गया है. सरकार के बयान के मुताबिक, इन बदलावों का उद्देश्य उन महापुरुषों को श्रद्धांजलि देना है, जिन्होंने भारतीय संस्कृति के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

किन जगहों के बदले गए नाम?

हरिद्वार जिले में -

  • औरंगजेबपुर - शिवाजी नगर
  • गाजीवाली - आर्य नगर
  • चांदपुर - ज्योतिबा फुले नगर
  • मोहम्मदपुर जाट - मोहनपुर जाट
  • खानपुर कुरसली - अंबेडकर नगर
  • इंद्रीशपुर - नंदपुर
  • खानपुर - श्री कृष्ण पुर
  • अकबरपुर फाजलपुर - विजयनगर

देहरादून जिले में-

  • मियांवाला - रामजी वाला
  • पीरवाला - केसरी नगर
  • चांदपुर खुर्द - पृथ्वीराज नगर
  • अब्दुल्ला नगर - दक्ष नगर

नैनीताल जिले में-

  • नवाबी रोड - अटल मार्ग
  • पनचक्की से आईटीआई रोड - गुरु गोलवलकर मार्ग

उधम सिंह नगर में-

  • सुल्तानपुर पट्टी - कौशल्या पुरी

अखिलेश यादव ने किया कटाक्ष

बता दें कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा, ''अगर नाम ही बदलने हैं, तो उत्तराखंड का नाम भी 'उत्तर प्रदेश-2' कर दीजिए.'' उनका कहना था कि सरकार सिर्फ नाम बदलने में व्यस्त है, जबकि जनता की असल समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा.

धामी सरकार के फैसले का समर्थन

इसके अलावा, टपकेश्वर महादेव मंदिर के आचार्य डॉ. विपिन जोशी ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा, ''हरिद्वार देवभूमि का मुख्य द्वार है और वहां के स्थानों के नाम सनातन संस्कृति के अनुरूप होने चाहिए. यह एक ऐतिहासिक फैसला है.''