menu-icon
India Daily

'7.5 प्रतिशत सैलरी बढ़ी, मालिक ने 10 प्रतिशत किराया बढ़ा दिया', बेंगलुरु में नौकरी कर रहे शख्स ने सुनाई आपबीती

शख्स ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो मेरा किराया एक दिन मेरे वेतन से भी ज्यादा हो जाएगा. लोग शख्स की इस पोस्ट पर जमकर कमेंट कर रहे हैं.

auth-image
Edited By: Sagar Bhardwaj
Bengaluru Rent

हाल ही में बेंगलुरु के एक निवासी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की, जिसने मेट्रो शहरों में जीवन यापन की बढ़ती लागत और वेतन वृद्धि व किराए में असंतुलन को लेकर चर्चा को फिर से हवा दे दी. इस पोस्ट में यूजर ने अपनी निराशा व्यक्त की कि जहां उनकी सैलरी में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, वहीं उनके मकान मालिक ने किराया 10 प्रतिशत बढ़ा दिया. इस पोस्ट ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया और लोगों के बीच गहरी प्रतिक्रिया उत्पन्न की.

सोशल मीडिया ने शुरू की बहस

इस यूजर की कहानी ने उन लोगों के दिल को छू लिया, जो ऐसी ही परेशानियों से जूझ रहे हैं. यूजर ने टिप्पणी की, “अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो मेरा किराया एक दिन मेरे वेतन से भी ज्यादा हो जाएगा.” यह भावना बेंगलुरु के कई कामकाजी पेशेवरों के बीच आम है. पोस्ट ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की, जिसमें कई यूजर्स ने वेतन ठहराव और बढ़ते किराए के अपने अनुभव साझा किए.

X यूजर्स के कमेंट्स
प्रतिक्रिया देने वालों में विवेक खत्री नामक एक यूजर ने इसे “शहरी घोटाला” करार दिया. उन्होंने कहा, “वेतन वृद्धि रेंगती है, जबकि किराया दौड़ता है. 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी अच्छी लगती है, लेकिन जब बिजली बिल 12 प्रतिशत, किराया 10 प्रतिशत और दूध 15 प्रतिशत बढ़ जाता है, तो यह मजाक बन जाता है. इस रफ्तार से एक दिन आपका मकान मालिक आपकी सैलरी से आपसे ज्यादा अमीर हो जाएगा.” उन्होंने इसे “बिना कानून के जीवनशैली कर” की संज्ञा दी.

कई अन्य यूजर्स ने भी बहस में हिस्सा लिया. कुछ ने व्यंग्यात्मक सुझाव दिया कि पेशेवरों को अपनी कंपनी और मकान मालिक दोनों बदल लेने चाहिए. एक यूजर ने कहा, “बेंगलुरु में ऑनसाइट नौकरी अब कम लाभकारी होती जा रही है.” वहीं, एक अन्य ने चुटकी ली, “मकान मालिक बनने का एक अलग फुल-टाइम कोर्स होना चाहिए.”

जीवन यापन की बढ़ती लागत
कई यूजर्स ने बताया कि मौजूदा आर्थिक माहौल में 10 प्रतिशत से कम वेतन वृद्धि नाकाफी है. एक यूजर ने कहा, “प्रशासन मुद्रास्फीति के आंकड़ों को दबाता है, और कंपनियां इसे मामूली वृद्धि का बहाना बनाती हैं. इस बीच, किराया, किराना और अन्य जरूरी चीजें हर साल 10 प्रतिशत बढ़ रही हैं—यह अब आम बात हो गई है. मेट्रो शहरों की हकीकत को स्वीकार करने का वक्त आ गया है!”