UPSC Success Story: सफलता केवल उन्हीं को मिलती है जो किसी भी असफलता या सुविधाएं की कमी के बावजूद कड़ी मेहनत करते हैं और अपने लिए एक जगह बनाते हैं. ऐसे ही कहानी कुछ UPSC उम्मीदवारों की है. UPSC क्रैक करने के लिए उम्मीदवार न दिन देखते हैं न रात. कुछ सफलता हासिल करने के लिए घर से किलोमीटर दूर रहे UPSC की तैयारी करते हैं. सरकारी अफसर बनने की चाह उम्मीदवार कई चीज त्याग देते हैं.
वहीं, कुछ उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिन्होंने दिव्यांग होने के बाद भी UPSC क्रैक करके दिखाया है. आज, हम आपके लिए पांच दिव्यांग भारतीयों के बारे में बताएंगे जिन्होंने सभी बाधाओं को पार करते हुए देश की सबसे कठिन एग्जाम में से एक UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की.
दिल्ली की रहने वाली इरा ने 2014 में अपने चौथे अटेम्प्ट में परीक्षा में टॉप किया. वह जनरल कैटेगरी से UPSC परीक्षा में टॉप करने वाली पहली शारीरिक रूप से विकलांग महिला बनीं. इरा को स्कोलियोसिस है जो रीढ़ से संबंधित बीमारी होती है. दिव्यांग होने के वजह से उन्हें सरकारी पद नहीं मिला था जिसके लिए उन्होंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) अर्जी डाली थी. 4 साल बाद इसे लेकर फैसला सुनाया गया. इसके बाद 2014 में इरा सिंघल को हैदराबाद में सरकारी पद पर नियुक्त किया गया.
केम्पा होन्नैया (Kempa Honnaiah) का जन्म कर्नाटक में हुआ था. जब वह तीसरी क्लास थे तब रेटिनल डैमेज के वजह से उनकी नजरें चले गई थी. कुछ समय पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने मैसूर के सरकारी ब्लाइंड स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी की. UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में 340 की रैंक हासिल करने के बाद वह अपनी जगह खूब मशहूर हो गए थे. उन्होंने बिना कोचिंग के 2016 में अपने तीसरे प्रयास में परीक्षा क्लियर की थी.
2017 में गोपाल कृष्ण रोनांकी ने UPSC में तीसरा रैंक हासिल किया था. उन्हें बालालता मल्लावरपु ने मार्गदर्शन दिया था, जिन्होंने 2016 में 167 वीं रैंक हासिल की थी. बता दें, साल 2002 में एक्सीडेंट होने के वजह से orthopaedic/locomotor physical disability का सामना कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के रहने वाले सतेंद्र ने 2018 में UPSC परीक्षा में 714 की AIR रैंक हासिल की थी. जब 1.5 साल के थे तब उन्हें निमोनिया हो गया था. जब उनके माता-पिता उसे अस्पताल ले गए, तो गलत इंजेक्शन लगने के वजह से उनकी रेटिना और ऑप्टिक नर्व को हुए नुकसान के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई. जिसके बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई करने का फैसला लिया.
साल 2014 में महाराष्ट्र के बीड स्थित जयंत मंकले ने रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा के कारण अपनी 75 प्रतिशत आंखें खो दी थी. उन्होंने बिना किसी कोचिंग के UPSC की तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने अपने पिता को खो दिया, जिनकी 7,300 रुपये की पेंशन ने मुश्किल से उनके कॉलेज की फीस चुकाने में मदद की. उनकी मां और बहन को घर का खर्चा चलाने के लिए घर के बने मसाले, अचार और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने का काम करना पड़ा. उनकी कड़ी मेहनत और लग्न से उन्होंने 2018 में अपने चौथे प्रयास में AIR का 923 हासिल की