कम पैसे, काम ज्यादा, फिर भी कुवैत क्यों जाते हैं भारतीय? समझिए पूरा खेल
Kuwait Fire incident: कुवैत की बिल्डिंग में आग लगने से 41 भारतीयों की मौत हो गई. घटना के बाद से भारत सरकार लगातार कुवैत सरकार के संपर्क में है. वहां भारतीयों को हर मदद पहुंचाने की कोशिश हो रही है. लेकिन, इस घटना के बाद सवाल उठता है कि विदेश में हुए किसी हादसे में इतने भारतीय कैसे मारे गए. आखिर भारत के कामगार कुवैत क्यों जाते हैं और कफाला सिस्टम क्या है?
Kuwait Fire Incident: कुवैत के मंगाफ शहर में बीते रोज मौत का मंजर देखने को मिला. यहां की एक बिल्डिंग में आग लग गई इसमें करीब 50 लोग मारे गए. वहीं 50 से ज्यादा लोग आग में झुलस कर घायल हो गए. हालांकि, घटना के बाद भारत सरकार सक्रिय हो गई. तत्काल कुवैत की सरकार से संपर्क किया गया. इसके साथ ही दूतावास के जरिए भारतियों को हर संभव मदद की कोशिश की गई. सबसे बड़ी बात की मरने वालों में 41 भारतीय थे. ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय कामगार कुवैत को ही क्यों चुनते हैं और ये कफाला सिस्टम क्या है?
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, 6 मंजिला इमारत में बुधवार को आग के कारण मरने वालों 41 लोग भारत के रहने वाले थे. इसके अलावा इनमें पाकिस्तान, फिलिपींस, मिस्र और नेपाल के लोग भी शामिल थी. घटना के बाद भारत के विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह कुवैत गए हैं. वहीं आज केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज भी वहां के लिए रवाना हो गए हैं.
खाड़ी में भारतीयों की संख्या ज्यादा
कुवैत के सार्वजनिक नागरिक सूचना प्राधिकरण की मानें तो दिसंबर 2023 तक देश की आबादी लगभग 49 लाख थी, इसमें 15 लाख के करीब स्थानीय और 39 फीसदी लोग प्रवासी थे. इनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है.
मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 10.34 मिलियन NRI 2 सौ से ज्यादा देशों में रह रहे हैं. इनमें UAE में 3 मिलियन, सऊदी में 2.59 मिलियन, कुवैत में 1.02, कतर में 74 लाख, ओमान में 7 लाख, बहरैन में सवा 3 लाख इंडियान है. इसके साथ अमेरिका में लगभग 1.28 मिलियन लोग रहते हैं.
क्यों जाते हैं भारतीय
अब सवाल उठता है की भारतीयों की पहली पसंद कुवैत या अन्य कोई गल्फ कंट्री क्यों होती है? इसका जवाब है कि हमारे देश का गल्फ के साथ करार है कि वो मजदूरों को न्यूनतम रेफरल वेतन दे. काम के अनुसार वेतन तय किया जाए. ऐसे में यहां से जाने वाले लोग वहां अच्छा पैसा कमाते हैं और अपने घर भेजते हैं. उनकी भारतीय करेंसी के हिसाब से काफी सेविंग हो जाती है. लेकिन वहां पहुंचने के बाद वो कफाला सिस्टम का शिकार हो जाते हैं.
क्या है कफाला सिस्टम?
कफाला सिस्टम के तहत एम्प्लॉयर को अपने कर्मचारी के प्रति अधिक अधिकार देता है. इसमें काम के घंटे ज्यादा होते हैं, पगार तय नहीं होती. कई मजदूरों के पासपोर्ट, फोन जब्त कर लिए जाते हैं. उन्हें एक तय एरिया से बाहर जाने की इजाजत नहीं होती. छुट्टियां भी नहीं मिलती है. इसी कारण पैसे तो ज्यादा मिलते हैं
पासपोर्ट जब्त हो जाने से उनके पास कोई चारा नहीं बचता. इसे वहां की सरकारें भी नहीं रोकती हैं क्योंकि, इससे उनका फायदा होता है और कम दाम में काम हो जाता है. हालांकि, कुछ समय पहले यूनाइटेड नेशन्स ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी तब इन देशों ने इसे खत्म करने की बात कही थी लेकिन अभी तक ये जारी है.