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कौन हैं महरंग बलोच, अकेली महिला ने पाकिस्तान सरकार की नाक में कर रखा है दम, जानें बलूचिस्तान से खास कनेक्शन?

बलूचिस्तान में स्थित संघर्ष और दमन की स्थिति अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है. महरंग बलोच की गिरफ्तारी और बलूचिस्तान में चल रहे आंदोलनों से पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं.

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Edited By: Mayank Tiwari
बलूचिस्तान की ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट मेहरान बलोच
Courtesy: X@MahrangBaloch_

बलूचिस्तान, पाकिस्तान का एक ऐसा इलाका जो सालों से चल रहे संघर्षों का शिकार रहा है. ऐसे में अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. हाल ही में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा एक ट्रेन हाइजैकिंग की घटना ने इस क्षेत्र में बढ़ते असंतोष को और स्पष्ट कर दिया. इस हमले में करीब 60 लोगों की जान चली गई और यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सुरक्षा संकट बन गया. इस घटना के बाद पाकिस्तान सरकार और सेना के नेताओं ने एक विशेष बैठक आयोजित की, ताकि देश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की जा सके.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट के बीच, बलूचिस्तान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच की गिरफ्तारी ने एक नई हलचल पैदा कर दी है. महरंग बलोच, जो बलूच यकजिती समिति (BYC) की प्रमुख हैं, उनको आतंकवाद, राजद्रोह और हत्या जैसे गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया. उनकी गिरफ्तारी के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा कड़ी निंदा की गई है. साल 2023 में महरंग बलोच को टाइम मैगजीन द्वारा 100 आगामी उभरते नेताओं में शामिल किया गया था. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी ने पाकिस्तान में बलूच आवाजों के दमन की एक और मिसाल पेश की है.

जानिए कौन है महरंग बलोच और कैसा रहा उनका संघर्ष

महरंग बलोच ने बलूचिस्तान में लापता लोगों के मुद्दे पर हमेशा आवाज उठाई है. साल 2009 में उनके पिता, अब्दुल गफ्फार लांगोवे, को जबरन गायब कर दिया गया था, और तीन साल बाद उनका शव लसबेला जिले में पाया गया. इसके बाद महरंग बलोच ने लापता लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया. हाल ही में, दिसंबर 2023 में उन्होंने लापता लोगों के खिलाफ एक बड़ा मार्च आयोजित किया था, जिसे पुलिस द्वारा दबा दिया गया.

बलूचिस्तान में बढ़ती असहमति और संघर्ष

बलूचिस्तान में समर्थन, चाहे वह हिंसक हो या अहिंसक, तेजी से बढ़ रहा है, खासकर युवाओं के बीच. इस असंतोष की जड़ें मानवाधिकारों के उल्लंघन में हैं, जहां पाकिस्तानी सेना ने एक गुप्त युद्ध छेड़ा है, जो दो दशकों से जारी है. हजारों लोग लापता हो गए हैं, और हजारों की हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि सरकार इन घटनाओं से मुंह मोड़ रही है.

राजनीतिक समाधान की उम्मीद में कमी

पाकिस्तान में बलूचिस्तान के राजनीतिक समाधान की उम्मीद भी समाप्त होती जा रही है, खासकर 2018 और 2024 के चुनावों में सैन्य हस्तक्षेप के आरोपों के बाद, जिन्होंने लोकप्रिय बलूच राष्ट्रवादी नेताओं को हाशिए पर डाल दिया. यही कारण है कि बलूचिस्तान में शांतिपूर्ण आंदोलन और विरोध की आवाजें लगातार तेज हो रही हैं.

महरंग बलोच की गिरफ्तारी और पाकिस्तान की नीतियां

महरंग बलोच की गिरफ्तारी को लेकर मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि यह बलूच कार्यकर्ताओं के खिलाफ एक व्यापक दमन की रणनीति का हिस्सा है. बलूचिस्तान में महिलाओं द्वारा नेतृत्व किए गए विरोध प्रदर्शनों ने महरंग बलोच की रिहाई की मांग की है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने अभी तक महरंग बलोच के खिलाफ आरोपों की पारदर्शिता पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.