Islamabad: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार हनन और बलूच समुदाय के दमन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाजें उठने लगी हैं. बलूच आंदोलन की नेता माहान बलूच ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से पाकिस्तान सरकार के अत्याचारों को रोकने के लिए हस्तक्षेप की अपील की है.
बलूचों पर जुल्म के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग
बता दें कि बलूच ने एक्स पर पोस्ट कर संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन का संज्ञान लेने की गुहार लगाई है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बलूचों के खिलाफ जारी दमन और नरसंहार को रोका जाए. साथ ही बलूच नेताओं का कहना है कि लोगों को जबरन घरों और सड़कों से उठा लिया जाता है. बिना किसी अपराध के उन्हें अनिश्चितकाल तक कैद में रखा जाता है या मार दिया जाता है. सैकड़ों निर्दोष बलूच पिछले दशकों में लापता हो चुके हैं, जबकि कई युवाओं को फर्जी मुठभेड़ों में मौत के घाट उतारकर उनके शव परिवारों को सौंप दिए गए.
महरंग बलूच के साथ जेल में ज्यादती
बताते चले कि पाकिस्तानी जेल में बंद बलूच कार्यकर्ता महरंग बलूच को लेकर भी उनके परिवार ने गंभीर चिंता जताई है. उनकी बहन नादिया बलूच ने एक्स पर बताया कि जब वे अपनी मां के साथ महरंग से मिलने गईं, तो उन्हें आठ घंटे तक इंतजार कराया गया. इसके बाद भी महरंग से आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं दी गई और सिर्फ एक मोटे कांच के पार से टेलीफोन पर कुछ मिनट की बातचीत की इजाजत दी गई.
वहीं नादिया बलूच के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद महरंग से मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई. परिवार को उनकी बीमारी की सूचना मिलने के बाद उनसे मिलने की कोशिश की गई थी. परिजनों ने महरंग के लिए न्याय की मांग की है.
बलूच मार्च के दौरान आत्मघाती हमला
इसके अलावा, बलूच आंदोलन की नेता डॉ. महरंग बलूच और अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में सरदार अख्तर मेंगल के नेतृत्व में वाध से क्वेटा तक एक लांग मार्च निकाला गया. लेकिन दक्षिण मस्तुंग के लकी पास के पास एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया. इस हमले में सरदार अख्तर मेंगल और अन्य नेता बाल-बाल बच गए. पुलिस ने लांग मार्च की सुरक्षा बढ़ा दी है और हमले की जांच शुरू कर दी गई है.