पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. इस विरोध में इमरान खान के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी पार्टी, तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), विरोध मार्चों का आयोजन कर रही है. यह विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से और भी बढ़ गया है. इमरान खान के समर्थन में जनता का उत्साह बढ़ने के साथ ही पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को पूरी तरह से सील कर दिया गया है ताकि विरोध प्रदर्शन को रोका जा सके.
पीटीआई के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इस्लामाबाद, खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को आंशिक रूप से बंद कर दिया गया है. इस्लामाबाद और रावलपिंडी नें मेट्रो बस सेवाओं समेत सार्वजनिक परिवहन को बंद कर दिया गया है. इसके अलावा फैजाबाद के सभी बस टर्मिनलों पर बैरिकेडिंग की गई है. दरअसल इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने जनता से अपील की है कि वे गुलामी की बेड़ियां तोड़ें और इस विरोध मार्च में शामिल हों. पार्टी का कहना है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र और न्याय का शासन खतरे में है और उन्हें इसे बचाने के लिए संघर्ष करना होगा. पीटीआई के नेताओं ने कहा है कि देश में कानून का शासन समाप्त हो चुका है और इमरान खान की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं कर रही है. पार्टी ने विरोध के रूप में बड़े पैमाने पर मार्च और रैलियां आयोजित करने का निर्णय लिया है.
इमरान खान की गिरफ्तारी पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास का एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मई 2023 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उनकी गिरफ्तारी के बाद से उनके समर्थकों ने तीव्र विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था. जहां सभी इमरान की रिहाई की मांग कर रहे हैं. ये विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में फैल गए थे, जिसमें इस्लामाबाद, कराची, लाहौर, पेशावर, और अन्य शहर शामिल थे.
पाकिस्तान सरकार विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए कई कठोर कदम उठा रही है. विरोध प्रदर्शन के दौरान, पाकिस्तान की सरकार ने पुलिस और सेना को आदेश दिया है कि वे किसी भी तरह से विरोध को शांत करें और कानून व्यवस्था बनाए रखें. विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इसके अलावा, कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया गया और कई जगहों पर इंटरनेट सेवा भी रोक दी गई ताकि विरोध प्रदर्शन को फैलने से रोका जा सके. सरकार का कहना है कि देश में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करना जरूरी है लेकिन इमरान खान और उनके समर्थक इसे एक तानाशाही का रूप मानते हैं और यह आरोप लगाते हैं कि सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है.
इमरान खान के समर्थकों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए इस्लामाबाद को पूरी तरह से सील कर दिया गया है. इस्लामाबाद की सड़कें खाली कर दी गई हैं और प्रमुख सरकारी इमारतों के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. पुलिस और सेना के जवान सड़कों पर मुस्तैद हैं और उन्हें हर प्रकार के विरोध प्रदर्शन को रोकने का आदेश दिया गया है. इस्लामाबाद में कई प्रमुख स्थानों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं और कई जगहों पर प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है.
इमरान खान के विरोधी आरोप लगाते हैं कि इमरान खान की सरकार ने पाकिस्तान के संस्थानों और कानूनों का दुरुपयोग किया. उनके शासन के दौरान कई फैसलों को लेकर विवाद उठे थे, जिनमें उनके कुछ नीतिगत फैसले और विदेश नीति से जुड़े मुद्दे प्रमुख थे. इसके अलावा, उनकी पार्टी पीटीआई पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे, जो उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए थे. इमरान खान के समर्थक इसे एक साजिश मानते हैं, जिसमें राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और सैन्य प्रतिष्ठान की मिलीभगत हो सकती है.
पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक प्रभाव बहुत मजबूत है और इमरान खान की पार्टी की आलोचनाओं का एक प्रमुख बिंदु यही है कि सेना का बहुत ज्यादा हस्तक्षेप है. इमरान खान ने अपनी सरकार के दौरान सेना के साथ अच्छे रिश्ते बनाए थे लेकिन बाद में उनके और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच मतभेद बढ़ने लगे। यह मतभेद उनके विरोध के कारण बने और उनके समर्थकों का मानना है कि इमरान खान को सत्ता से हटाने के लिए सेना और राजनीतिक विपक्ष ने मिलकर साजिश की. बता दें कि इमरान खान के समर्थक अभी भी उन्हें एक नायक मानते हैं और उनका मानना है कि अगर इमरान खान को न्याय मिलेगा, तो पाकिस्तान में लोकतंत्र मजबूत होगा. वहीं, सरकार और सेना का कहना है कि उनके खिलाफ उठाए गए कदम देश के हित में हैं.
वहीं अब उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी पीटीआई द्वारा बार-बार हमले के आह्वान पर सवाल उठाया तथा इसे देश के खिलाफ एक 'सुविचारित साजिश' करार दिया. इसके अलावा संघीय सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि पीटीआई के अधिकांश नेता और कार्यकर्ता 'अवैध और अनावश्यक' विरोध प्रदर्शन में भाग लेने से बचने के लिए गिरफ्तारी की तैयारी कर रहे हैं.