Donald Trump Liberation Day tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फायर समझा क्या? ये तो फायर निकला! अगर आपने अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा देखी है तो यह डॉयलॉग आपको जरूर याद होगा. इस समय यह डॉयलॉग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सटीक बैठ रहा है. उनके टैरिफ एक्शन से ट्रेड वॉर छिड़ चुका है. अब ट्रम्प ने अपने व्यापार नीति के तहत 'मुक्ति दिवस' (Liberation Day) के रूप में एक नया टैरिफ सिस्टम लागू करने की घोषणा की है. 2 अप्रैल से यह नया टैरिफ सभी देशों पर लागू होगा. यह कदम ट्रम्प की ओर से एक आक्रामक व्यापार रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उनके व्यापार संबंधों को फिर से संतुलित करने की कोशिश की जा रही है.
ट्रम्प प्रशासन ने पहले ही विभिन्न देशों पर व्यापारिक प्रतिबंध लागू किए हैं. फरवरी में, ट्रम्प ने कनाडा और मेक्सिको से आने वाली वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसका उद्देश्य अवैध आव्रजन और फेंटानाइल तस्करी पर कड़ी कार्रवाई करना था. चीन पर भी 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था, जिसके पीछे आरोप था कि चीन वैश्विक फेंटानाइल तस्करी में शामिल है.
ट्रम्प ने यह स्पष्ट किया है कि 2 अप्रैल को लागू होने वाला टैरिफ सभी देशों पर लागू होगा, न कि सिर्फ कुछ विशेष देशों पर. इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि यह टैरिफ सिर्फ 10-15 देशों पर लागू किया जाएगा, लेकिन अब ट्रम्प ने इसे सभी देशों पर लागू करने की बात कही है.
भारत पर इस टैरिफ नीति का असर खासा गंभीर हो सकता है. ट्रम्प ने कई बार भारत को "टैरिफ किंग" के रूप में सम्बोधित किया है, यह आरोप लगाते हुए कि भारत अमेरिका से आयात होने वाली वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लगाता है. वर्तमान में, भारत का औसत टैरिफ दर 17 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका का औसत टैरिफ दर 3.3 प्रतिशत है.
भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों जैसे स्टील, एल्युमीनियम, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स पर इस नई टैरिफ नीति का बुरा असर पड़ सकता है. यदि अमेरिका इन उत्पादों पर उच्च टैरिफ लगाएगा, तो भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और भी कठिन हो जाएगा. इससे उन क्षेत्रों में काम करने वाले बड़े उद्योगों के लिए नुकसान हो सकता है.
भारत के लिए, अमेरिका का यह नया टैरिफ कई क्षेत्रीय उद्योगों पर असर डाल सकता है. अमेरिका भारत का प्रमुख निर्यातक देश है, और अमेरिका से संबंधित वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, एल्युमीनियम और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है. भारतीय निर्यातकों के लिए यह संकट का कारण बन सकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में भारत की बड़ी कंपनियों की आय अमेरिकी बाजार पर निर्भर करती है.
भारत इस नई टैरिफ नीति का मुकाबला करने के लिए तैयार हो सकता है. सरकार ने अमेरिकी आयातों पर टैरिफ कम करने पर विचार किया है, ताकि ट्रम्प के टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर कम हो सके. इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी चर्चा चल रही है.