Chinese Economy News: भारत का पड़ोसी चीन इस समय अपनी अर्थव्यवस्था के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. उसकी अर्थव्यवस्था दबाव में है और हिलोरें खा रही है. उसकी अर्थव्यवस्था के हालात सुधरने के बजाए लगातार बिगड़ते ही जा रहे हैं. चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और पूरी दुनिया के लिए कच्चे उत्पाद का सबसे बड़ा स्रोत है. कोरोनाकाल के दौरान आई अर्थव्यवस्था में मंदी और उसकी उसी तेजी से हुई रिकवरी के बाद अर्थव्यवस्था के हाल बदले लेकिन उसके बाद परिस्थितियां अब बिलकुल उलट हैं. ग्लोबल कंपनियों का घर माना जाने वाला चीन उनका भरोसा खो रहा है. वही कंपनियां अब चीन के विकल्प के रूप में भारत को वरीयता दे रही हैं. चीन की विकास रफ्तार धीमी हो गई है,बेरोजगारी दर बढ़ रही है.वहीं उसे घरेलू तकलीफों से भी दो-चार होना पड़ रहा है. चीन का रियल स्टेट सेक्टर भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. कहने को तो इसे चीन की समस्या कहा जा सकता है लेकिन वैश्वीकरण की अवधारणा के बाद यह समस्या सिर्फ चीन की नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए हो गई हैं. दुनियाभर के देशों पर भी चीन के इस संकट का प्रभाव जरूर पड़ेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से भले ही ग्लोबल कंपनियों का मोहभंग हो रहा है, उसके बाद भी वह सैकड़ों ग्लोबल कंपनियों का सेफ हाउस है. आइफोन बनाने वाली एप्पल से लेकर फॉक्सवैगन,और फैशन ब्रांड बरबेरी जैसी कई कंपनियों की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा चीन से आता है. जानकार बताते हैं कि चीन यदि आर्थिक संकट में फंसता है और चीनी नागरिकों की खरीदने की शक्ति घटती है तो इन बड़ी कंपनियों की सेहत भी बिगड़ेगी. इससे इन कंपनियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर से जुड़े लोग बड़ी मात्रा में प्रभावित होंगे. रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के एक तिहाई विकास में चीन का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसे में यह संकट केवल उसका ही संकट नहीं माना जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा था कि चीन की मंदी दुनियाभर के विकास कार्यों को प्रभावित कर रही है. इसे देखते हुए अमेरिकी क्रेडिट एजेंसी ने 2024 को लेकर अपने लगाए गए पूर्वानुमान को कम कर दिया है. चीन के व्यापारिक मामलों के जानकार कहते हैं कि चीन आयात से ज्यादा निर्यात पर जोर देता है. इसका मतलब यह कि वह दूसरे देशों को सामान भेजता ज्यादा है और मंगाता कम है. ऐसे में दुनिया के कई देश चीन के सस्ते सामान के ऊपर बुरी तरह से निर्भर हैं,चीन की मुश्किलों के बढ़ने पर उन देशों की तकलीफों का बढ़ना भी तय है. चीन जिन देशों से आयात करता है उनकी बैलेंसशीट बिगड़ने का भी खतरा है.
चीन ने बीते 10 सालों में अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट BRI में एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक निवेश किया है. इस प्रोजेक्ट के तहत चीन ने कई देशों को बेशुमार पैसा बांटा है. इस प्रोजेक्ट के तहत चीन ने 150 से ज्यादा देशों को सड़क, बंदरगाह,पुल बनाने के लिए पैसा और तकनीकी मदद की है.ऐसे में चीन के संकट में फंसने पर यह सभी प्रोजेक्ट्स खटाई में पड़ जाएंगे. इससे इस प्रोजेक्ट से जुड़े देशों के बूरी तरह से प्रभावित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है. आर्थिक मामलों के जानकार बताते हैं कि चीन का दुनिया के प्रति नजरिया चाहें जो हो लेकिन उसका आर्थिक रूप से मजबूत रहना पूरी दुनिया के स्वास्थ्य के हित में है.