'खालसा राज का सपना देखना जुर्म नहीं...', मां के खिलाफ क्यों बोलने लगा सांसद अमृतपाल?
वारिस पंजाब दे के चीफ अमृतपाल ने 5 जुलाई को लोकसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली. अमृतपाल ने जेल में रहकर ही खडूर साहिब लोकसभा सीट से चुनाव जीता है. वह बीते एक साल से असम के डिब्रूगढ़ के जेल में बंद है. शपथ लेने के लिए उसे विशेष विमान से दिल्ली लाया गया था. फिलहाल खडूर साहिब के सांसद यानी अमृतपाल को चार दिन की पैरोल दी गई है.
पंजाब के खडूर साहिब सीट से निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह ने 5 जुलाई को लोकसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली थी. उसके बाद अमृतपाल सिंह ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक बयान जारी किया है. जिसमें उन्होंने अपनी मां के बयान से खुद को अलग करते हुए पोस्ट में कहा, 'जब मुझे आज मां द्वारा कल दिए गए बयान के बारे में पता चला तो मेरा दिल बहुत दुखी हुआ. मुझे यकीन है कि यह बयान...'
अमृतपाल ने कहा, 'जब मुझे मां द्वारा दिए गए बयान के बारे में पता चला तो मन बहुत दुखी हुआ. बेशक, मुझे यकीन है कि यह बयान मां ने अनजाने में दिया होगा लेकिन फिर भी ऐसा बयान मेरे परिवार या मेरा समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति की तरफ से नहीं आनी चाहिए. खालसा का ख्वाब देखना कोई गुनाह नहीं है, गर्व की बात है. जिस रास्ते के लिए लाखों सिखों ने अपनी जान कुर्बान की है, उससे पीछे हटने का हम ख्वाब भी नहीं देख सकते हैं...'.
'...तो मैं हमेशा पंथ को ही चुनूंगा'
आगे उन्होंने कहा, 'मैंने मंच से बोलते हुए कई बार कहा कि अगर मुझे पंथ और परिवार में से किसी को चुनना पड़े, तो मैं हमेशा पंथ को ही चुनूंगा और इस संबंध में इतिहास का एक वाक्य बहुत सटीक बैठता है, जहां 14 साल बंदा सिंह बहादुर के साथ सिंहों ने उसकी जान बचाने के लिए मां को शहीद कर दिया और उसे सिख होने से अलग कर दिया और कहा कि यह मेरी मां नहीं है. बेशक यह उदाहरण इस घटना के लिए बेहद सख्त है लेकिन सैद्धांतिक नजरिए से यह समझने के काबिल है...'
'यह गलती दोहराई नहीं जाएगी..'
अमृतपाल सिंह ने अपने पोस्ट में कहा, 'मैंने इसके लिए अपने परिवार को कभी नहीं डांटा है. सिख राज्य पर समझौते के बारे में सोचना भी अस्वीकार्य है और उम्मीद है कि यह गलती दोहराई नहीं जाएगी.'
'युवाओं के पक्ष में बोल देने से अमृतपाल...'
जेल में बंद नेता अमृतपाल सिंह के लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद उनकी मां ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि पंजाब के युवाओं के पक्ष में बोलने से वह खालिस्तानी समर्थक नहीं बन जाते. अमृतपाल खालिस्तानी समर्थक नहीं है. क्या पंजाब के बारे में बोलना, पंजाब के युवाओं को बचाना उन्हें खालिस्तानी समर्थक बताना है, उन्होंने संविधान के दायरे में चुनाव लड़ा और अब उन्हें खालिस्तानी का समर्थक नहीं कहा जाना चाहिए.
अमृतपाल ने जेल से लड़ा लोकसभा चुनाव
बता दें कि अमृतपाल पंजाब की खडूर साहिब सीट से लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. अमृतपाल सिंह ने कांग्रेस के कुलबीर सिंह को हरा कर करीब दो लाख वोटों से चुनाव में जीत दर्ज की. अमृतपाल असम की जेल में बंद है. जेल में रहते हुए उसने लोकसभा का चुनाव लड़ा है. वारिश पंजाब दे संगठन के मुखिया अमृतपाल को पिछले साल नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था.