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India Daily

भारत के गांवों का सर्वे क्यों कर रहे हैं ड्रोन? सामने आई ये बड़ी वजह

सूचना में बताया गया कि दक्षिण-पश्चिम दिल्ली जिले में स्वामित्व योजना के तहत शिकारपुर का नक्शा ड्रोन सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है और गांव की संपत्तियों की सूची बनाई गई है.

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Edited By: Sagar Bhardwaj
Why are drones surveying villages in India

जुलाई 2022 में दिल्ली के शिकारपुर गांव में बच्चों का एक समूह गुलशन त्यागी के पास दौड़ता हुआ आया. उन्होंने चंचल अंदाज में पूछा, “क्या हम पर हमला हो रहा है, अंकल?” बच्चों ने बताया कि उन्होंने गांव के ऊपर एक ड्रोन उड़ते देखा था. त्यागी, जो गांव के निवासी हैं, ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया. लेकिन दो साल बाद, जब उन्होंने गांव के मंदिर की दीवार पर एक सार्वजनिक सूचना देखी, तो उन्हें ड्रोन के उद्देश्य का पता चला.

स्वामित्व योजना का उद्देश्य

सूचना में बताया गया कि दक्षिण-पश्चिम दिल्ली जिले में स्वामित्व योजना के तहत शिकारपुर का नक्शा ड्रोन सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है और गांव की संपत्तियों की सूची बनाई गई है. नक्शा मंदिर और चौपाल पर प्रदर्शित किया गया था. सूचना में कहा गया, “गांव वालों को नक्शा और सूची को अंतिम रूप देने से पहले 15 दिनों के भीतर अपनी दावेदारी और आपत्तियां, यदि कोई हों, प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाता है.” यह पहली बार था जब त्यागी और अन्य ग्रामीणों ने स्वामित्व योजना के बारे में सुना.

स्वामित्व, यानी ‘Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas’, केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे अप्रैल 2020 में शुरू किया गया था. इसका लक्ष्य ग्रामीण भारत में संपत्ति स्वामित्व के दस्तावेजों की कमी को दूर करना है. ज्यादातर ग्रामीणों के पास केवल खेतों के रिकॉर्ड हैं, घरों के स्वामित्व का कोई प्रमाण नहीं. इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने ड्रोन से गांवों का सर्वेक्षण शुरू किया और संपत्ति कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू की.

सर्वेक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया
ड्रोन सर्वेक्षण के बाद डिजिटल नक्शों पर निजी संपत्तियों को पीले आयतों और सार्वजनिक संपत्तियों जैसे सड़कों, स्कूलों और मंदिरों को लाल आयतों से चिह्नित किया जाता है. इसके बाद अधिकारी गांवों में जाकर स्वामित्व की पुष्टि करते हैं और मालिकों की जानकारी जुटाते हैं. इस आधार पर ग्रामीणों को स्वामित्व दस्तावेज जारी किए जाते हैं, जिससे पुराने सरकारी रिकॉर्ड अपडेट होते हैं और संपत्ति विवादों का समाधान होता है.

योजना की प्रगति और चुनौतियां
सरकार ने इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया है. जनवरी 2025 तक 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 3 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन मैपिंग पूरी हो चुकी है. 18 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50,000 से अधिक गांवों के 65 लाख ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड वितरित किए. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने स्वामित्व योजना के जरिए गांव वालों को इतना सक्षम बनाया है कि यह भारतीय ग्रामीण जीवन को पूरी तरह बदल सकता है.”

हालांकि, भारी संसाधनों के बावजूद कई गांवों में योजना के क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं हैं. शिकारपुर में त्यागी और अन्य ग्रामीणों को मंदिर या चौपाल पर नक्शा नहीं मिला, उन्हें तहसीलदार से संपर्क करना पड़ा. दस्तावेजों में 56% घरों के डेटा में गलतियां थीं, जैसे मालिकों के नामों की वर्तनी से लेकर गंभीर त्रुटियां, जिसमें एक गैर-मौजूद व्यक्ति ‘सुरेश’ को चार प्लॉट आवंटित किए गए थे.

व्यापक समस्याएं और विशेषज्ञ की राय
स्क्रॉल की रिपोर्टिंग से पता चला कि यह समस्या सिर्फ शिकारपुर तक सीमित नहीं है. गुजरात में निजी संपत्ति को सार्वजनिक सड़क के रूप में चिह्नित किया गया, तो झारखंड के खूंटी जिले में ग्रामीणों ने योजना की जानकारी और ग्राम सभा से परामर्श न होने पर सर्वेक्षण रुकवा दिया. नॉटिंघम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर टॉम कोवान, जो तीन साल से स्वामित्व पर शोध कर रहे हैं, ने कहा, “अधिकारियों पर समय-सीमा का दबाव है, जिसके कारण कई मामलों में गांवों से पूरी सलाह नहीं ली गई.”

कोवान ने योजना की मूल अवधारणा पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “यह योजना जमीन को सिर्फ वित्तीय नजरिए से देखती है, इसका मकसद इसे ऋण-योग्य संपत्ति बनाना है. लेकिन भारत में, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में, जमीन सामूहिक स्वामित्व में होती है, जिसे ड्रोन की हवाई तस्वीरें नहीं पकड़ सकतीं.”