नीट की परीक्षाओं में मिले ग्रेस मार्क को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही ग्रेस मार्क पाने वाले 1563 बच्चों को फिर से परीक्षा देनी होगी. इस पूरे प्रकरण पर पटना के प्रोफेसर आशुतोष झा ने बेबाकी से अपनी बात को रखा है. उन्होंने बताया कि आखिर क्यों ग्रेस मार्क का मुद्दा इतना ज्यादा छाया है. प्रोफेसर आशुतोष ने बताया कि नीट परीक्षा विवादों में हैं, पेपर लीक फिर नंबर बांटने में धांधली हुई.इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ग्रेस मार्क का कोई भी नीट में प्रोविजन नहीं है. ग्रेस मार्क तभी आता है, जब एक सवाल के दो आंसर होते हैं या किसी सवाल में कंफ्यूजन होता है . वहीं, अगर कुछ विद्यार्थियों को देर से पेपर मिला और उनका टाइम लॉस हुआ तो उसको कवर करने के लिए ग्रेस देना सही नहीं है.
एनटीए ने 1563 विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क दिए हैं, इसकी वजह से कई बच्चों का 720 में 720 तक मार्क्स आ गए हैं. यही पूरा विवाद है. मऊ के छात्र ने बताया कि शुरुआत में उसको 519 मार्क्स मिले. इसके बाद उसके मार्क्स मात्र 219 रह गए. जब उसने पता किया तो उसे पता चला कि उसे ग्रेस मार्क मिले थे. एनटीए से डॉयरेक्ट सवाल पूछने पर जबाव नहीं मिलता है. अगर हम कोर्ट के माध्यम से जाते हैं तो ही हमें क्लीयरिफिकेशन मिलता है. नीट में एक विषय 180 मार्क का होताा है. ऐसे में अगर एक बच्चे को 200 ग्रेस मार्क्स दिए जाएंगे तो मेधावी बच्चों का क्या होगा. एनटीए ने ट्रांसपैरेंट सिस्टम क्यों नहीं रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से और क्लीयरिफिकेशन मांगा है. उन्होंने आरोप लगाया कि ये सब पेपर लीक के मुद्दे को छिपाने के लिए किया गया है.
उन्होंने बताया कि देश में एक सिंडिकेट है, जिसमें सॉल्वर गैंग के सदस्य है.जो पेपर को लीक करता है. एनटीए पूरी जानकारी मुहैया नहीं करा रहा है. इस कारण एक्शन नहीं हो पा रहा है. पेपर लीक होने के कारण अभ्यर्थी इतने अच्छे नंबर ला पा रहे हैं.अभी हाल में ही शिक्षा मंत्री का बयान आया कि पेपर लीक नहीं हुआ सिर्फ ग्रेस मार्क में अनियमितता हुई. ऐसा इसलिए है क्यों कि बड़े लेवल के अधिकारियों और मंत्रियों का धांधली का पता नहीं होता है. एनटीए ने उन्हें जो डेटा दिया वे उसपर बयान दे देते हैं. जब कि अब कोर्ट के आदेश पर इंडिपेंडेंट कमेटी बनेगी और जांच होगी.