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'मुसलमानों से कब्रिस्तान, दरगाह छीन लेंगे...', वक्फ बिल पर ओवैसी का तीखा विरोध

Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने नए वक्फ विधेयक पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, इसे वक्फ बोर्ड को खत्म करने और मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों को छीनने का प्रयास बताया है.

Imran Khan claims
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Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक पर कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने इसे वक्फ बोर्ड को कमजोर करने और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने की साजिश करार दिया. ओवैसी का कहना है कि सरकार इस विधेयक के जरिए मुस्लिम प्रबंधन को खत्म करना चाहती है.

ओवैसी ने एक साक्षात्कार में कहा, ''इस सरकार का हर संशोधन वक्फ बोर्ड को नष्ट करने और मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए लाया जा रहा है. हम इस सरकार पर कैसे भरोसा करें, जिसमें एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है और जो बुलडोजर राजनीति अपनाती है?'' उन्होंने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति के प्रावधान को भी असंवैधानिक बताते हुए कहा कि जब हिंदू धार्मिक बोर्डों में केवल हिंदू सदस्य हो सकते हैं, तो यही नियम वक्फ बोर्ड पर क्यों लागू नहीं होता?

विधेयक संविधान के खिलाफ - ओवैसी

बता दें कि ओवैसी ने कहा कि यह बिल संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक मामलों के स्वतंत्र प्रबंधन का अधिकार देता है. ''संविधान हमें अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है, लेकिन अब सरकार इसमें हस्तक्षेप कर रही है.'' उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि सरकार पहले 1995 के वक्फ अधिनियम और 2013 के संशोधन का समर्थन कर चुकी थी, लेकिन अब हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए इसमें बदलाव किए जा रहे हैं.

वक्फ संपत्तियों पर कब्जे का आरोप

वहीं इसको लेकर सरकार का दावा है कि वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और अतिक्रमण को रोकने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है, लेकिन ओवैसी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ''पहले से ही कानून में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे के लिए दो साल की सजा का प्रावधान है. फिर नए संशोधन की क्या जरूरत है?'' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों को सरकारी संपत्ति घोषित करने की कोशिश कर रही है.

'सरकार हिंदू धार्मिक बोर्डों को पैसा देती है, लेकिन वक्फ को नहीं'

ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार हिंदू धार्मिक ट्रस्टों को आर्थिक सहायता देती है, लेकिन वक्फ संपत्तियों के विकास के लिए कोई बजटीय अनुदान जारी नहीं किया जाता. उन्होंने यह भी खारिज कर दिया कि वक्फ भारत का तीसरा सबसे बड़ा भूमिधारक है, इसे उन्होंने 'प्रचार' बताया.

'सरकार का असली मकसद मस्जिदों पर कब्जा करना'

ओवैसी ने संसद और संभल में मस्जिदों को लेकर जारी कानूनी विवाद का हवाला देते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर वक्फ संपत्तियों को निशाना बना रही है. आगे उन्होंने कहा, ''अगर यह विधेयक पास होता है तो जिला कलेक्टर को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह वक्फ की जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित कर सके. यह मस्जिदों को निशाना बनाने और हिंदू-मुस्लिम विवाद भड़काने की साजिश है.''

'यह देश सिर्फ एक धर्म का नहीं है'

इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा, ''मोदी जी कहते हैं, 'अगर आप मुसलमान हैं, तो हमें पांच साल के लिए दिखाइए.' आप कौन होते हैं ये तय करने वाले? मुसलमानों के अधिकार कोई छीन नहीं सकता.'' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह विधेयक पारित हुआ तो यह भारत के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर देगा और सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है.

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