संशोधित वक्फ विधेयक, जिसे अगस्त 2024 में संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था, 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जाएगा. सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है. इंडिया टुडे टीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, इस विधेयक को पहले भी कड़ा विरोध झेलना पड़ा है. वरिष्ठ भाजपा मंत्रियों के भारत गठबंधन के नेताओं के साथ इस विधेयक को संसद में पेश करने से पहले चर्चा करने की उम्मीद है.
बजट सत्र का समापन और विधेयक की राह
संसद का मौजूदा बजट सत्र 4 अप्रैल को समाप्त होने वाला है. इस विधेयक को प्रभावी होने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित होना जरूरी है. यह विधेयक वक्फ बोर्डों के प्रशासन को पुनर्गठित करने का प्रयास करता है, जो मुस्लिम समुदाय के भीतर धार्मिक और परोपकारी उद्देश्यों के लिए नामित संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं. इस प्रस्ताव ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है, जिसमें विपक्षी नेता इसे असंवैधानिक और मुस्लिम विरोधी करार दे रहे हैं.
संयुक्त समिति की सिफारिशें शामिल
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त समिति की सिफारिशों को शामिल करने के बाद इस विधेयक को मंजूरी दी, जिसने इसके संसदीय बहस का मार्ग प्रशस्त किया. मूल रूप से यह विधेयक अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद इसे अगस्त 2024 में समिति के पास भेजा गया था. सूत्रों का कहना है कि विधेयक को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की उम्मीद है.
विधेयक का उद्देश्य और विवाद
वक्फ विधेयक का मकसद वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और सुधार लाना है. इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने और संपत्ति विवादों के लिए जिला कलेक्टर को निर्णायक बनाने जैसे प्रावधान हैं. हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को कमजोर करता है. संसद में 2 अप्रैल को होने वाली बहस इस मुद्दे पर निर्णायक साबित हो सकती है.