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Waqf Amendment Bill: 'वक्फ बिल समाज में फूट डालने की साजिश', कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने केंद्र को घेरा

Waqf Amendment Bill: इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में सुधार करना, तकनीकी प्रबंधन को लागू करना है. इसे पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था.

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Edited By: Ritu Sharma
Waqf Amendment Bill
Courtesy: Social Media

Waqf Amendment Bil 2025: वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से लाए गए वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर संसद में तीखी बहस छिड़ गई. केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा इसे लोकसभा में पेश किए जाने के बाद, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार 'लोगों को बांटने' की कोशिश कर रही है.

गौरव गोगोई का हमला – 'संविधान पर सीधा प्रहार'

बता दें कि लोकसभा में चर्चा के दौरान असम से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ''यह विधेयक सिर्फ भ्रम पैदा करने के लिए लाया गया है. पहले के कानून में विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के साथ-साथ बोर्ड में दो महिलाओं को शामिल करने का प्रावधान था. लेकिन सरकार की असली मंशा कुछ और है.''

वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान के मौलिक अधिकारों और संघीय ढांचे पर हमला है. गोगोई ने सरकार पर अल्पसंख्यकों को बदनाम करने और समाज को विभाजित करने का भी आरोप लगाया.

रिजिजू पर लगाया भ्रामक बयान देने का आरोप

गोगोई ने किरेन रिजिजू पर पिछली यूपीए सरकार को लेकर गलत बयानबाजी करने का आरोप लगाया और उनसे अपने दावों के प्रमाण देने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार का असली एजेंडा एक विशेष समुदाय की संपत्तियों को निशाना बनाना है.

उन्होंने चेतावनी दी कि ''आज वे एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं, कल यह अन्य समुदायों तक भी फैल सकता है.'' गोगोई ने आगे कहा, ''ईद के दौरान पूरे देश में लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में नमाज़ पढ़ने तक की अनुमति नहीं दी गई. पहले सरकार को यह बताना चाहिए कि उनके पास कितने अल्पसंख्यक सांसद हैं.''

सरकार का पक्ष - पारदर्शिता और सुधार पर जोर

हालांकि, सरकार की ओर से किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया है. उन्होंने बताया कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने 97.27 लाख से अधिक याचिकाओं और ज्ञापनों का अध्ययन किया और 25 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों समेत 284 प्रतिनिधिमंडलों से राय ली गई. रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक को लाने से पहले कानूनी विशेषज्ञों और नेताओं से भी सलाह ली गई थी.