राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सीनियर नेता सुरेश जोशी (भैया जी जोशी) ने हाल ही में औरंगजेब के विषय पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया.। उनका कहना था कि 'औरंगजेब का विषय अनावश्यक उठाया गया है' और यह केवल एक विवाद पैदा करने की कोशिश है. उनके अनुसार, 'अगर औरंगजेब की मृत्यु भारत में हुई और उसकी कब्र भी यहीं बनी है, तो यह कोई नई बात नहीं है. जिनको श्रद्धा है, वे वहां जाकर उसकी कब्र पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं.
न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष नेता सुरेश भैयाजी जोशी ने इस विषय को और स्पष्ट करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, 'छत्रपति शिवाजी महाराज ने अफजल खान की कब्र बनवाने का काम किया था, जो भारत की उदारता और समावेशिता का प्रतीक है.
उनका यह बयान दर्शाता है कि भारत की संस्कृति में समावेशिता और सहिष्णुता की परंपरा रही है, जिसमें विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान किया जाता है.
RSS के टॉप लीडर सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा–
‘औरंगजेब का विषय अनावश्यक उठाया गया है। उसकी मृत्यु यहां हुई तो कब्र यहां बनी हुई है। जिनको श्रद्धा है, वो जाएंगे। छत्रपति शिवाजी महाराज ने तो अफजल खान की कब्र बनवाई थी। भारत की ये उदारता की समावेशिता का प्रतीक है। वो कब्र रहे, जिसको… pic.twitter.com/6ZxEwm3RSU
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) March 31, 2025
RSS के टॉप लीडर सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा–
‘औरंगजेब का विषय अनावश्यक उठाया गया है। उसकी मृत्यु यहां हुई तो कब्र यहां बनी हुई है। जिनको श्रद्धा है, वो जाएंगे। छत्रपति शिवाजी महाराज ने तो अफजल खान की कब्र बनवाई थी। भारत की ये उदारता की समावेशिता का प्रतीक है। वो कब्र रहे, जिसको… pic.twitter.com/6ZxEwm3RSU
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) March 31, 2025
सुरेश भैयाजी जोशी ने ये भी साफ किया कि भारत की समावेशिता की परंपरा को कायम रखना चाहिए. उनके मुताबिक, 'वो कब्र रहे, जिनको जाना है, वे जाएं.' इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति की श्रद्धा के लिए उसकी कब्र या स्मारक का अस्तित्व होना चाहिए, और जो लोग उस पर श्रद्धा व्यक्त करना चाहते हैं, उन्हें इसका अधिकार है.