केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में चर्चा और मंजूरी के लिए वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया. संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को बढ़ाना, प्रौद्योगिकी-संचालित प्रबंधन को एकीकृत करना, कानूनी जटिलताओं को सरल बनाना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है.
जैसे ही संशोधन विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया सदस्य गरमागरम बहस में शामिल हो गए. रिजिजू ने सदन में अपने तर्कों के दौरान कहा कि वक्फ विधेयक का नाम बदलकर एकीकृत वक्फ प्रबंधन सशक्तीकरण, दक्षता और विकास (यूएमईईडी) विधेयक कर दिया गया है. इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष की खिंचाई करते हुए कहा कि कुर्सी पीटना बंद करो.
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि वक्फ विधेयक संविधान को कमजोर करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है. चल रही बहस के दौरान, भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने वक्फ को महज एक वैधानिक निकाय बताया और जन कल्याण में इसके योगदान पर सवाल उठाया. वक्फ बोर्ड महज एक वैधानिक इकाई है. इसकी संपत्तियों पर कितने स्कूल और अस्पताल बनाए गए हैं? उन्होंने समुदाय की सेवा करने में इसकी भूमिका को चुनौती देते हुए पूछा.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ संशोधन विधेयक पर कथित रूप से गलत सूचना फैलाने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा और आश्वासन दिया कि यह कानून मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता. लोकसभा में कानून पर बहस में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वक्फ बिल मुसलमानों के धार्मिक मामलों और उनके द्वारा दान की गई संपत्तियों में हस्तक्षेप है, यह वोट बैंक के लिए डर पैदा करने वाला है.