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India Daily

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार, 23 साल पुराना है मामला

अदालत ने बुधवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और कहा कि उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के मानहानि मामले में प्रोबेशन बांड जमा करने और एक लाख रुपये का जुर्माना जमा करने के उसके आदेश का "जानबूझकर" उल्लंघन किया.

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Edited By: Gyanendra Sharma
Medha Patkar
Courtesy: Social Media

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. मेधा पाटकर के खिलाफ साकेत कोर्ट ने 23 अप्रैल को गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया था, जिसके बाद शुक्रवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें आज साकेत कोर्ट में पेश किया जाएगा.

इससे पहले दिल्ली अदालत ने बुधवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और कहा कि उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के मानहानि मामले में प्रोबेशन बांड जमा करने और एक लाख रुपये का जुर्माना जमा करने के उसके आदेश का "जानबूझकर" उल्लंघन किया.

अदालत ने स्थगन के लिए उनकी याचिका को "तुच्छ और शरारतपूर्ण" पाया तथा इसे अदालत को धोखा देने के इरादे से दायर किया. अदालत ने पाटकर को उनकी इस कार्रवाई के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इससे अदालत को "उदार सजा पर पुनर्विचार" करना पड़ सकता है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने कहा कि 8 अप्रैल को दिए गए सजा के आदेश का पालन करने के लिए अदालत के समक्ष उपस्थित होने के बजाय, दोषी (पाटकर) अनुपस्थित है और जानबूझकर सजा के आदेश का पालन करने और मुआवजा राशि जमा करने के अधीन परिवीक्षा का लाभ लेने में विफल रही है. बुधवार को मामला पाटकर की उपस्थिति, परिवीक्षा बांड प्रस्तुत करने और जुर्माना राशि जमा करने के लिए सूचीबद्ध किया गया था.

एलजी सक्सेना के वकील गजिंदर कुमार ने कहा कि पाटकर न तो उपस्थित हुईं और न ही उन्होंने अदालत के निर्देशों का पालन किया. उन्होंने कहा, आज के मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त के माध्यम से पाटकर के खिलाफ एनबीडब्ल्यू (गैर जमानती वारंट) जारी किया गया है और अदालत ने पाया है कि दोषी द्वारा स्थगन की मांग के लिए दायर आवेदन शरारतपूर्ण और तुच्छ है.