'राम ने रोका' से 'राम भक्त सत्ता में' तक, इंद्रेश कुमार का यू टर्न, RSS-BJP ने शुरू कर दिया डैमेज कंट्रोल?
RSS and BJP: बीते कुछ दिनों से आरएसएस और बीजेपी नेताओं के बीच चल रही खींतचान अब शायद डैमेज कंट्रोल मोड में जा रही है. आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि जिन लोगों ने राम भक्ति का संकल्प लिया, वह सत्ता में हैं. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का नाम लेकर कहा कि देश उनके नेतृत्व में आगे बढ़ने को तत्पर है और देश का वातावरण भी एकदम स्पष्ट है कि राम भक्त सत्ता में हैं और राम के विरोधी सत्ता से बाहर हैं.
इस लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक के बीच मतभेद देखने को मिले. खुद बीजेपी के नेताओं ने माना कि RSS ने जमीन पर पहले जितनी सक्रियता नहीं दिखाई. बताया गया कि RSS के नेता कुछ फैसलों को लेकर बीजेपी नेतृत्व से नाराज हैं. बीच चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने यह भी कह दिया कि अब बीजेपी को आरएसएस की जरूरत नहीं है. हाल ही में आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा था कि जिन लोगों में अहंकार था, उनको भगवान राम ने 240 पर रोक दिया. इस बयान के बाद जमकर हंगामा हुआ. अब इंद्रेश कुमार ने एक और बयान दिया है जिससे लगता है कि आरएसएस और बीजेपी के बीच डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू हो गई हैं. इंद्रेश कुमार ने अब कहा है कि जिन लोगों ने राम का विरोध किया वे सत्ता से बाहर हैं और जो राम भक्त थे, वे सत्ता में हैं.
अब अपने बयान पर सफाई देते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा है, 'ऐसा है कि आज देश का वातावरण एकदम स्पष्ट है. जिन्होंने राम का विरोध किया, वह सब सत्ता से विरोध किया, वह सब सत्ता से बाहर हैं. जिन लोगों ने राम की भक्ति का संकल्प लिया, वह सत्ता में हैं और तीसरी बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बन गई है. देश उनके नेतृत्व में दिन-दूनी और रात-चौगुनी तरक्की करेगा, यह विश्वास जन-जन के मन में जागृत हुआ है और यह विश्वास फले-फूले इसकी शुभकामना करते हैं.'
राहुल गांधी और केजरीवाल पर भी बोले इंद्रेश कुमार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बारे में इंद्रेश कुमार ने कहा, 'मैंने तो इसलिए कहा कि राहुल ने यह घोषणा की थी कि मैं लिखकर देता हूं कि 4 तारीख को देश के प्रधानमंत्री नहीं होंगे. केजरीवाल ने कहा था कि मैं लिखकर देता हूं कि इंडी अलायंस को इतनी सीटें आएंगी. उन्होंने राजनीति के स्टाइल में बयान दिया था, आप इसे जो चाहे कह सकते हैं. मैं इस बारे में सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि देश आगे बढ़ चुका है और वह अपनी नई मंजिल और नए आयाम को नए नेतृत्व के साथ देखना चाहता है. भगवान ने नरेंद्र मोदी, बीजेपी और एनडीए को यह सुअवसर दिया है कि वह इस देश को तेज गति से आगे बढ़ाएं.'
इंद्रेश कुमार के इस दूसरे बयान को डैमेज कंट्रोल की कोशिश माना जा रहा है. दूसरी तरफ, आरएसएस की ओर से भी यह कहा जा रहा है कि उसके और बीजेपी के बीच कोई दरार नहीं है. सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि आरएसएस अब सफाई दे रहा है कि मोहन भागवत ने अहंकार से जुड़ी जो बातें कही थीं, वे नरेंद्र मोदी या किसी बीजेपी नेता के खिलाफ नहीं थीं.दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर कहा था कि एक साल से यह सब जारी है और इस पर ध्यान देना चाहिए. इंद्रेश कुमार के बयान पर भी अब आरएसएस की ओर से कहा गया है कि यह संघ का नहीं, इंद्रेश कुमार का निजी बयान है.
आगे क्या होगा?
चुनाव नतीजों में उम्मीद के मुताबिक कामयाबी न मिलने और बीजेपी को अकेले बहुमत न प्राप्त होने के बाद काफी उथल-पुथल देखी जा रही है. महाराष्ट्र के नेता सी आर पाटिल ने तो यह भी कह दिया कि आरएसएस को यह हक है कि वह बीजेपी के नेताओं को डांट सके. दरअसल, इस बार आरोप लग रहे हैं कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मनमानी की और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आरएसएस जैसे संगठनों को भी दरकिनार कर दिया गया था. नतीजा यह हुआ कि आरएसएस ने चुनाव में वह सक्रियता ही नहीं दिखाई.
31 अगस्त से केरल में बीजेपी और आरएसएस की समन्वय बैठक होने जा रही है. वार्षिक स्तर पर होने वाली इस बैठक में संभवत: चुनाव के नतीजों की समीक्षा भी की जाएगी. साथ ही, इस बात पर भी चर्चा हो सकती है कि कैसे भविष्य में इस तरह के आपसी विवाद न हों, जिनका नतीजा चुनावी हार में तब्दील हो सके.