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'लड़की का अंडरवेयर उतारना, नंगा होना रेप नहीं,' राजस्थान HC के फैसले पर क्या सोचते हैं कानून के जानकार?

राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने एक फैसले में कहा है कि लड़की का अंडरवेयर उतारना, रेप नहीं है बल्कि एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना है. इसे रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता है. राजस्थान हाई कोर्ट के इस फैसले पर लोग तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं. कानून के जानकार इस फैसले पर क्या कहते हैं, आइए समझते हैं.

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Edited By: India Daily Live
Rajasthan High Court
Courtesy: Rajasthan High Court

'किसी नाबालिग लड़की का अंडरवेयर निकालना, खुद नंगा हो जाना, रेप की कोशिश नहीं है. इसे महिला के गरिमा को ठेस पहुंचाना कहा जाएगा.' राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में ये टिप्पणी की है. हाई कोर्ट ने 33 साल पुराने एक केस में यह फैसला सुनाया है. सुवालाल पुत्र बनाम राजस्थान सरकार केस में राजस्थान हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. जस्टिन अनूप कुमार ढांड ने फैसला सुनाते हुए कहा है, 'लड़की का अंडरवेयर उतारना, और पूरी तरह नंगा हो जाना, भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 511 के तहत नहीं आता है. इसे रेप की कोशिश के तहत नहीं रखा जा सकता है.' 

CNN-न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक  कोर्ट ने रेप की कोशिश की परिभाषा बताई है. राजस्थान हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि यह मामला, किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है. इसे धारा 354 के तहत दंडनीय अपराध माना जा सकता है. 

केस की सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, 'मेरे विचार में ये तथ्य धारा 376 और 511 के तहत साबित नहीं होते हैं. दूसरे शब्दों में आरोपी को रेप की कोशिश करने के आरोप में दोषी नहीं माना जा सकता है. अभियोन पक्ष यह साबित करने में कामयाब हुआ है कि यह एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला अपराध है. यह मामला धारा 354 के तहत आता है. आरोपी तैयारियों से आगे नहीं गया था.'

क्या है ये केस?

9 मार्च 1991 को शिकायतकर्ता ने टोंक जिले के तोरड़सिंह पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.  उसकी 6 साल की पोती पानी पीने के लिए कुंए पर गई थी. आरोपी सुवालाल वहां करीब 8 बजे आया और उसे जबरन धर्मशाला लेते गया. वह उसका रेप करना चाहता था. लड़की चिल्लाने चीखने लगी तो गांव वाले वहां आए और बचा ले गए. वह रेप नहीं कर पाया. सुवाला तब 25 साल का था, जब उसने अपराध किया था.

राजस्थान हाई कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने दामोदर बेहरा बनाम ओडिशा और सित्तू बनाम राजस्थान सरकार का हवाला देते हुए कहा कि एक आरोपी ने एक लड़की को जबरन नंगा किया और उसके साथ जबरन संबंध बनाने की कोशिश की. इसे रेप नहीं माना जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि रेप साबित करने के लिए तीन स्टेज हर हार में पूरे होने चाहिए, तभी अपराधों को रेप की कोशिश की श्रेणी में रखा जाना हिए.

इस फैसले पर क्या कहते हैं कानून के जानकार?

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल अरुण मिश्र बताते हैं कि अगर इस हद तक कोई आगे बढ़ जाए तो उसे रेप माना जाना चाहिए. किसी की मर्जी के बिना उसके कपड़े उतारना, उसके साथ रेप की कोशिश करना, रेप ही है लेकिन अदालतों के फैसले इस पर अलग-अलग हैं. रेप की कोशिश के लिए पेनेट्रेशन होना जरूरी होता है, अगर वह नहीं है तो इसे रेप की कोशिश कानूनी तौर पर नहीं कहा जा सकता है.

सिद्धार्थनगर यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र सिद्धार्थ बताते हैं कि आदर्श स्थिति यह है कि अगर कोई ऐसी हरकत करता है तो उसे भी रेप की कोशिश की माना जाना चाहिए. अगर ऐसे मामलों में कोई बाहरी दखल न हो तो रेप हो सकता है. कई ऐसे मामले आए हैं जब आरोपी डर की वजह से भाग गए हैं या चीखने चिल्लाने से पीछे हट गए हैं. ऐसे मामलों में पीड़िताओं को वही त्रासदी झेलनी पड़ती है, जो रेप पीड़िताएं झेलती हैं. ऐसे में इस हरकत को भी रेप की कोशिश ही माना जाना चाहिए. यह भी रेप से पहले की आपराधिक तैयारी है.