राजपूतों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता परषोत्तम रूपाला का एक बयान अब पार्टी के गले की फांस बन गया है. केंद्र सरकार में मंत्री परषोत्तम रूपाला से राजपूत इतने नाराज हैं कि अब उनका टिकट काटने की मांग की जाने लगी है. बीजेपी ने राज्यसभा सदस्य रूपाला को इस बार गुजरात की राजकोट सीट से चुनाव में उतारा है. अब उनके विरोध में उतरे राजपूतों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया है. इसमें परषोत्तम रूपाला के बयान पर रोष जताते हुए कहा गया कि 'हम राजपूत हैं, भाजपूत नहीं.' इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने रूपाला पर पलटवार करते हुए यह तक कह दिया कि हम डरते नहीं हैं, हमारे बाप-दादाओं ने अपनी बहन बेटियां नहीं दी हैं.
परषोत्तम रूपाला के बयान के विरोध में क्षत्रिय समाज ने रविवार को राजकोट के रतनपुर गांव में एक विशाल सभा का आयोजन किया. इस सभा में आई भीड़ बीजेपी की चिंता बढ़ाने वाली है. अपने बयान पर परषोत्तम रूपाला कई बार माफी मांग चुके हैं लेकिन राजपूतों का कहना है कि बीजेपी इस सीट से रूपाला की उम्मीदवारी वापस ले. अब बीजेपी को अल्टीमेटम भी दे दिया गया है कि अगर रूपाला का टिकट वापस नहीं लिया जाता तो गुजरात की सभी 26 सीटों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और बीजेपी का बहिष्कार किया जाएगा. बता दें कि इस सीट पर नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 18 अप्रैल है.
रतनपुर गांव में आयोजित इस विशाल सम्मेलने में लगभग 2 लाख लोग शामिल हुए. महिलाएं भी भगवा साड़ी पहनकर रैली में शामिल हुईं. श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना भी यहां वक्ता बनकर पहुंचे. इसी रैली में एक वक्ता ने कहा, 'जो भाजपा के हैं, वो डरते होंगे, हम डरते नहीं हैं. हम राजपूत हैं, भाजपूत नहीं हैं. बहुत सारे राजपूत, भाजपूत बनकर भाजपा का काम कर रहे हैं. यानी वो लोग रूपाला जी की बात से सहमत हैं और उनके बाप-दादाओं ने अपनी बहन-बेटियां दी होंगी. हमारे बाप-दादाओं ने नहीं दी हैं, हम लड़ रहे हैं.'
राजपूत और #भाजपूत में अंतर बताते गुजरात के युवा नेता…😜🙃 pic.twitter.com/XEtHhxdIdU
— फूफा जी का फटकारा (@Fatkara24) April 15, 2024
इसी साल 22 मार्च को दलित संगठनों के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए परषोत्तम रूपाला पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में रूपाला ने कहा, 'पुराने समय के महाराजाओं ने अंग्रेजों से अपनी बेटियों की शादी कर दी थी.' वायरल वीडियो के मुताबिक, परषोत्तम रूपाला ने यह भी कहा कि राजाओं और राजघरानों ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेक दिए, उनके साथ रोटी तोड़ी और यहां तक कि अपनी बेटियों की शादी भी उनसे की लेकिन हमारे रुखी समाज (एक दलित समुदाय) ने न तो अपना धर्म बदला और न ही ऐसे रिश्ते बनाए.
कड़वा पाटीदार समुदाय से आने वाले परषोत्तम रूपाला ने अपने इस बयान के लिए 29 मार्च को हाथ जोड़कर माफी मांगी. उन्होंने कहा, 'मैं अपने बयान के लिए माफी मांगता हूं. मेरे लिए यह बेहद अफसोस की बात है कि मेरे मुंह से ऐसे शब्द निकले.' उनके बयान के बाद राजपूत समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए. जगह-जगह रूपाला के पुतले फूंके जाने लगे और उनकी उम्मीदवारी निरस्त करने की मांग की जाने लगी.
गुजरात में राजपूतों की जनसंख्या लगभग 19 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे में अगर राजपूतों की नाराजगी जारी रहती है तो राजकोट के साथ-साथ कई अन्य सीटों पर भी इसका असर पड़ सकता है. राजकोट सीट पर ही राजपूत मतदाताओं की संख्या लगभग 50 हजार है. वहीं, राजकोट जिले में कुल आबादी लगभग 3 लाख है. राजपूत संगठनों का दावा है कि कई अन्य जातियां भी उनके साथ हैं.