Jharkhand Assembly Elections: हरियाणा, महाराष्ट्र के साथ-साथ झारखंड में भी इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने लगी है. एनडीए के सहायक दलों को छिटकने से रोकने के लिए भाजपा के लिए इन तीनों में से कम से कम दो राज्यों में जीत हासिल करनी होगी, ताकि सहयोगियों में यह संकेत जाए कि जनता अभी भी भाजपा के साथ है. वहीं इंडिया गठबंधन की सहयोगी जेएमएम ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी, आदिवासी, खनन आदि जैसे मुद्दों के साथ झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को पटखनी देने की प्लानिंग कर ली है.
इंडिया गठबंधन को JMM के काम पर भरोसा
इंडिया गठबंधन को भरोसा है कि झारखंड के लोगों को जेएमएम द्वारा राज्य में कराए जा रहे काम पसंद आ रहे हैं. इंडिया गठबंधन का यह भी मानना है कि हेमंत सोरेन को जेल भिजवाए जाने से झारखंड की जनता नाराज है, जिसका उन्हें लोकसभा चुनाव में भायदा मिला और विधानसभा चुनाव में भी उन्हें इसका फायदा मिलने की उम्मीद है.
चंपाई सोरेन ने बढ़ाई काम की रफ्तार
वहीं हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद सीएम बनाए गए चंपाई सोरेन ने राज्य में सभी कामों को समय पर पूरा कराने की रफ्तार तेज कर दी है. जनता को खुश करने के लिए उन्होंने खाली पड़े पदों पर तुरंत नियुक्ति करने के सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने सभी अधिकारियों और नेताओं को सितंबर तक सारे काम पूरा करने को कहा है.
हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को भुनाएगा इंडिया ब्लॉक
हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी भुनाएगा इंडिया ब्लॉक हेमंत सोरेन आदिवासी समुदाय से आते हैं. इंडिया ब्लॉक के नेता आदिवासी लोगों को इस बारे में बताकर विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे. वे इस बात पर आदिवासियों की सहानुभूति बटोंगे कि कैसे भाजपा के इशारे पर ईडी ने आपके नेता को सलाखों के पीछे कर दिया. लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को इस मुद्दे पर लाभ भी मिला है.
एनडीए के पास क्या होगी विपक्ष की काट
वहीं एनडीए ने झारखंड में उसके खिलाफ बह रही बयार को पलटने की पूरी योजना बना ली है. झारखंड विधानसभा चुनाव में एनडीए के पास जेएमएम और इंडिया गठबंधन को घेरने के तीन प्रमुख मुद्दे होंगे. इनमें पहला मुद्दा है भ्रष्टाचार जिसके तहत भाजपा झारखंड में मनरेगा घोटाला, खनन घोटाला, जमीन घोटाला, टेंडर कमीशन घोटाला, शराब घोटाला और सत्ता की दलाली जैसे मुद्दों को उठाएगी. एनडीए की पूरी कोशिश होगी की जेएमम सरकार के सरंक्षण में हो रहे घोटालों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाई जाए. एनडीए लोगों को यह भी याद दिलाने की कोशिश करेगी कि जिसे आपने सत्ता सौंपी वही भ्रष्टाचार का मसीहा बन गया.
दूसरा मुद्दा है घुसपैठियों को राज्य सरकार का संरक्षण. संताल परगना इलाकों में जिस तरह से बांग्लादेशी घुसपैठियों ने अपनी शरण स्थली बना ली है उससे डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आया है. एनडीए का आरोप है कि राज्य सरकार ने जानते हुए भी इसकी खुली छूट दे रखी है.
तीसरा मुद्दा है नियोजन का. राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं और रिक्तियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं. सरकार के साढ़े चार साल बीत गए पर नियुक्तियों के मामले में ज्यादातर घोषणाओं तक ही सीमित रह गया. भाजपा इसे राज्य के युवाओं के साथ छल मानती है.