Odisha Assembly Protest: ओडिशा विधानसभा में उस समय काफी परेशानी खड़ी हो गई जब 12 निलंबित कांग्रेस विधायकों ने सदन में अपना विरोध जारी रखा. इनकी मांग है कि एक समिति गठित की जानी चाहिए जिसमें आठ महीने के भाजपा शासन के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की जांच की जा सके. स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम समेत इन विधायकों को 7 दिनों के लिए निलंबित किया था.
निलंबन से बचने वाले दो कांग्रेस विधायकों में से एक ताराप्रसाद बहिनीपति ने कहा था कि हमने सदन के वेल में रात बिताने और समिति के गठन की मांग जारी रखने का फैसला किया है. अगर वो चाहते हैं तो उन्हें मार्शल या पुलिस का इस्तेमाल करके हमें बाहर निकालने दें. हम डरते नहीं हैं.
#WATCH | Bhubaneswar: Suspended MLAs sleeping in the well of Odisha Legislative Assembly.
— ANI (@ANI) March 25, 2025
Video Source: Odisha Congress pic.twitter.com/gZHWCdmVoR
निलंबित विधायकों में सागर चरण दास, मंगू खिल्ला, सत्यजीत गोमांगो, अशोक कुमार दास, दशरथी गमंगो और सोफिया फिरदौस शामिल थे. ताराप्रसाद बहिनीपति और रमेश जेना निलंबन से बच गए क्योंकि वो घोषणा के दौरान वहां मौजूद नहीं थे. बता दें कि बहिनीपति को इससे पहले 11 मार्च को सात दिन का निलंबन मिला था.
कांग्रेस ने कई तरह से विरोध किया जिसमें घंटा-घड़ियाल बजाना, रामधुन गाकर आदि शामिल था. उन्होंने पहले सदन की समिति की वकालत की थी और फिर सीटी, बांसुरी और झांझ बजाकर कार्यवाही बाधित की थी. विधानसभा में 7 मार्च से लगातार कुछ न कुछ देखने को मिल ही रहा है.
#WATCH | Bhubaneswar, Odisha: Senior leaders of Congress were prohibited from entering the Vidhan Sabha after Odisha Assembly Speaker Surama Padhy suspended 12 Congress MLAs from the House for seven days on charges of "indiscipline, disrespecting the Chair and violating rules"… pic.twitter.com/CfLmY9Rdny
— ANI (@ANI) March 25, 2025
उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई के नेतृत्व में हुई बैठक में स्थिति का समाधान नहीं हो पाया. बीजद के तीन वरिष्ठ सदस्यों ने अध्यक्ष से निलंबन पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया. ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने विरोध का बचाव करते हुए कहा था कि इसमें गलत क्या है? यह मंदिरों में किया जाता है और विधानसभा भी लोकतंत्र का मंदिर है. यह सरकार को जगाने का एक साधन था, जो महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चुप रही.