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India Daily

ओडिशा के निलंबित विधायकों ने सदन में काटी रात, जमकर किया प्रदर्शन

Odisha Assembly Protest: ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस विधायक विरोध कर रहे हैं. ये सभी विधायक निलंबित हैं और महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को लेकर समिति गठित की जाने की मांग कर रहे हैं.

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Edited By: Shilpa Srivastava
Odisha Assembly protest
Courtesy: X (Twitter)

Odisha Assembly Protest: ओडिशा विधानसभा में उस समय काफी परेशानी खड़ी हो गई जब 12 निलंबित कांग्रेस विधायकों ने सदन में अपना विरोध जारी रखा. इनकी मांग है कि एक समिति गठित की जानी चाहिए जिसमें आठ महीने के भाजपा शासन के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की जांच की जा सके. स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम समेत इन विधायकों को 7 दिनों के लिए निलंबित किया था. 

निलंबन से बचने वाले दो कांग्रेस विधायकों में से एक ताराप्रसाद बहिनीपति ने कहा था कि हमने सदन के वेल में रात बिताने और समिति के गठन की मांग जारी रखने का फैसला किया है. अगर वो चाहते हैं तो उन्हें मार्शल या पुलिस का इस्तेमाल करके हमें बाहर निकालने दें. हम डरते नहीं हैं. 

इन विधायकों को किया गया निलंबित: 

निलंबित विधायकों में सागर चरण दास, मंगू खिल्ला, सत्यजीत गोमांगो, अशोक कुमार दास, दशरथी गमंगो और सोफिया फिरदौस शामिल थे. ताराप्रसाद बहिनीपति और रमेश जेना निलंबन से बच गए क्योंकि वो घोषणा के दौरान वहां मौजूद नहीं थे. बता दें कि बहिनीपति को इससे पहले 11 मार्च को सात दिन का निलंबन मिला था.

कांग्रेस ने कई तरह से विरोध किया जिसमें घंटा-घड़ियाल बजाना, रामधुन गाकर आदि शामिल था. उन्होंने पहले सदन की समिति की वकालत की थी और फिर सीटी, बांसुरी और झांझ बजाकर कार्यवाही बाधित की थी. विधानसभा में 7 मार्च से लगातार कुछ न कुछ देखने को मिल ही रहा है.

उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई के नेतृत्व में हुई बैठक में स्थिति का समाधान नहीं हो पाया. बीजद के तीन वरिष्ठ सदस्यों ने अध्यक्ष से निलंबन पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया. ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने विरोध का बचाव करते हुए कहा था कि इसमें गलत क्या है? यह मंदिरों में किया जाता है और विधानसभा भी लोकतंत्र का मंदिर है. यह सरकार को जगाने का एक साधन था, जो महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चुप रही.