बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने सोमवार को नागपुर हिंसा के दो आरोपियों, फहीम खान और यूसुफ शेख, के घरों को ढहाने पर रोक लगा दी. कोर्ट ने प्रशासन को "अत्याचार" के लिए कड़ी फटकार लगाई. फहीम खान का दो मंजिला मकान कोर्ट के आदेश से पहले ही गिरा दिया गया था, लेकिन यूसुफ शेख के घर के अवैध हिस्से को ढहाने की कार्रवाई कोर्ट के निर्देश के बाद रोक दी गई.
कोर्ट में सुनवाई और सवाल
जस्टिस नितिन सांबरे और वृषाली जोशी की खंडपीठ ने दोनों आरोपियों की याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की. कोर्ट ने सवाल उठाया कि मकान मालिकों को उनकी संपत्ति के कथित अवैध हिस्सों को गिराने से पहले सुनवाई का मौका क्यों नहीं दिया गया. पीठ ने कहा कि प्रशासन ने "अत्याचार" के साथ यह कार्रवाई की. कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ढहाई अवैध पाई गई, तो प्रशासन को नुकसान की भरपाई करनी होगी.
हिंसा के बाद कार्रवाई
17 मार्च को हुई हिंसा के केंद्र महाल क्षेत्र में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच नागपुर नगर निगम ने फहीम खान के घर को अनधिकृत निर्माण के लिए ढहा दिया. यूसुफ शेख के मकान का अवैध हिस्सा हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी, लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप से यह रुक गई. दोनों आरोपियों ने उसी दिन हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई पर रोक की मांग की थी.
अगली सुनवाई की तारीख
फहीम खान के वकील अश्विन इंगोले ने बताया कि कोर्ट ने सरकार और नगर निगम से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी. कोर्ट के इस फैसले ने प्रशासनिक कार्रवाइयों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.