Foreign Media On Modi 3.0 Cabinet: नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ कैबिनेट में 71 सांसदों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. हालांकि, अभी तक मंत्रियों के बीच पोर्टफोलियो का बंटवारा नहीं हुआ है. मोदी के कैबिनेट में सहयोगी दलों के सांसदों को भी शामिल किया गया है. सहयोगियों को लेकर ही भाजपा ने अबकी बार गठबंधन वाली सरकार बनाई है. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद ये पहली बार होगा जब नरेंद्र मोदी अपने सहयोगियों के साथ सत्ता शेयर करेंगे.
नरेंद्र मोदी, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री चुने जाने वाले दूसरे नेता हैं. विदेशी मीडिया ने प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह का कवरेज किया है. एक अखबार ने लिखा कि भारत में राजनीतिक माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है. इसका मतलब ये था कि नरेंद्र मोदी अपने तीसरे टर्म के कार्यकाल में पहली बार NDA के सहयोगियों के साथ सत्ता शेयर कर रहे हैं.
आइए, जानते हैं कि मोदी और उनके कैबिनेट के शपथ ग्रहण पर किस विदेशी मीडिया ने क्या लिखा?
अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने लिखा कि जैसे ही नई सरकार ने शपथ ली, वैसे ही नई दिल्ली की राजनीतिक हवा बदली हुई दिख रही है. बहुमत नहीं मिलने के चलते पीएम मोदी ने सहयोगी दलों का रुख किया है और अब सहयोगी दल सरकार का हिस्सा हैं.
ब्रिटिश मीडिया संस्थान (बीबीसी) ने लिखा कि मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल शुरू हो गया है, लेकिन आम चुनाव में विपक्ष को बढ़त मिली है. NDA गठबंधन ने एग्जिट पोल्स में बताए गए आंकड़ों को तो नहीं छुआ, लेकिन सरकार बनाने में सफल रहे.
कुवैती मीडिया संस्थान अल जजीरा लिखता है कि मोदी सरकार को बहुमत की कमी काफी चुनौतियां पेश करेंगी. अल जजीरा ने एनडीए के सहयोगियों चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार से मिलने वाली चुनौतियों की भी आशंका जताई है और लिखा है कि नई मोदी सरकार को सभी सहयोगियों को साधकर चलना होगा.
ब्लूमबर्ग ने प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में विदेशी मेहमानों के आगमन और 8000 लोगों की मौजूदगी में शपथ लेने का जिक्र किया है. ब्लूमबर्ग ने शपथ ग्रहण की भव्यता, इसमें फिल्म स्टार और उद्योग जगत के लोगों को आमंत्रित करने के बारे में भी लिखा. लेख में ये भी लिखा गया है कि ये पहली बार है, जब प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता में रहने के लिए सहयोगियों के समर्थन की जरूरत हुई है.
फ्रांस की एएफपी समाचार एजेंसी ने इस आयोजन का पूरा ब्यौरा दिया है. सजावट से लेकर गठबंधन सहयोगियों तक, जिनका समर्थन सरकार के गठन के लिए महत्वपूर्ण था. समाचार एजेंसी ने लिखा कि हालांकि नए मंत्रिमंडल में किसे कौन सा पोर्टफोलिया मिलेगा, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. एजेंसी ने ये भी लिखा कि बड़े गठबंधन दलों में शामिल टीडीपी और जेडीयू ने अपने समर्थन के बदले में भारी मांग की है.
द गार्जियन की कवरेज में मोदी के तीसरे कार्यकाल के संभावनाओं पर बात की. साथ ही पिछले कार्यकाल, भारत की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्थित पर उनकी नीतियों के प्रभाव के बारे में लिखा. द गार्जियन ने मोदी के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में भी लिखा, जिसमें आर्थिक सुधार और गठबंधन में शामिल पार्टियों से तालमेल बिठाना शामिल था.