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India Daily

मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में 6 महीने के लिए MHA ने बढ़ाया AFSPA कानून, जानिए क्या है वजह?

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और सुरक्षा संकट को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने AFSPA लागू कर दिया है. यह राज्य की स्थिति को स्थिर करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय और राज्य सरकार की ओर से उठाया गया एक साहसिक कदम है.

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Edited By: Mayank Tiwari
मणिपुर में तैनात सुरक्षाकर्मी
Courtesy: Social Media

गृह मंत्रालय ने रविवार (30 मार्च) को मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए हैं. इसके तहत मंत्रालय ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) को 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे मणिपुर राज्य में लागू कर दिया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश के तिराप, चांगलांग और लॉन्गडिंग जिलों के साथ-साथ राज्य के 3 पुलिस थाना क्षेत्रों में भी AFSPA को अगले छह महीने के लिए लागू किया गया है. साथ ही गृह मंत्रालय ने AFSPA को नगालैंड के 8 जिलों और राज्य के 5 अन्य जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों में 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है.

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन और राजनीतिक अस्थिरता

मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता के बीच, 13 फरवरी 2023 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था, और विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था. मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद यह कदम उठाया गया. बीरेन सिंह, जो 2017 से भाजपा सरकार की अगुवाई कर रहे थे, उन्होंने 21 महीने तक चलने वाले जातीय हिंसा के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इस हिंसा में 250 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जो मई 2023 से जारी है.

नार्थ ईस्ट की सुरक्षा स्थिति को लेकर MHA ने उठाया ये कदम

AFSPA का विस्तार मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है. गृह मंत्रालय के अनुसार, यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कारवाई को और प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है. AFSPA के तहत, सेना को विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं, जो हिंसा और अस्थिरता को काबू करने के लिए जरूरी माने जाते हैं.

क्या है AFSPA? जानिए क्यों पड़ती है इसकी जरूरत

AFSPA का पूरा नाम Armed Forces (Special Powers) Act है. यह भारत में एक विशेष कानून है जो सशस्त्र बलों को कुछ खास परिस्थितियों में अतिरिक्त अधिकार देता है। इसे पहली बार 1958 में लागू किया गया था, ताकि अशांत क्षेत्रों में शांति और व्यवस्था बनाए रखी जा सके.यह कानून उन क्षेत्रों में लागू होता है जो सरकार द्वारा "अशांत क्षेत्र"घोषित किए जाते हैं, जैसे कि जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों (नागालैंड, मणिपुर, असम आदि) के कुछ हिस्से.

हालांकि, इसे लेकर काफी विवाद भी रहा है. कई लोग इसे मानवाधिकारों के खिलाफ मानते हैं, क्योंकि इसके तहत सैनिकों को गलती होने पर भी कानूनी कार्रवाई से छूट मिल सकती है. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए जरूरी है.

AFSPA के तहत सशस्त्र बलों को कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं?

1- संदिग्ध व्यक्तियों को बिना वारंट गिरफ्तार करना.

2- संदिग्ध ठिकानों पर तलाशी लेना.

3- अगर जरूरी हो तो गोली चलाने का अधिकार, जिसमें जान भी जा सकती है, बशर्ते यह आत्मरक्षा या कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हो.

4- किसी भी सभा या जमावड़े को रोकने के लिए बल प्रयोग करना.