भारत सरकार ने सोमवार (31 मार्च) को न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें यह दावा किया गया था कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), जो कि एक सरकारी विमानन और रक्षा कंपनी है, उसने संवेदनशील तकनीक को एक ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को बेचा, जो रूस को हथियार आपूर्ति कर रही थी.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस रिपोर्ट को "तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक" करार देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट "राजनीतिक कथा को सटीक बनाने के लिए मुद्दों को गलत तरीके से पेश करती है.
MEA बोला- 'रिपोर्ट गलत और भ्रामक'
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में जिक्र की गई भारतीय कंपनी ने "सभी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पूरी तरह से पालन किया है. साथ ही रणनीतिक व्यापार नियंत्रण तथा अंतिम उपयोगकर्ता प्रतिबद्धताओं पर ध्यान दिया है.
विदेश मंत्रालय ने कहा, "भारत का मजबूत कानूनी और नियामक ढांचा रणनीतिक व्यापार को दिशा प्रदान करता है और इसकी कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक गतिविधियों को मार्गदर्शन करता है. मंत्रालय ने यह भी अनुरोध किया कि "प्रतिष्ठित मीडिया संगठनों को ऐसी रिपोर्ट पेश करते समय बुनियादी उचित परिश्रम करना चाहिए, जो इस मामले में नजरअंदाज किया गया.
जानिए न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में क्या छपा?
बता दें कि, ये विवाद तब उत्पन्न हुआ जब न्यूयॉर्क टाइम्स ने 28 मार्च को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया कि ब्रिटिश एयरोस्पेस निर्माता HR Smith Group ने HAL के माध्यम से रूस को लगभग 2 मिलियन डॉलर की संवेदनशील तकनीक भेजी.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन उपकरणों में ट्रांसमीटर, कॉकपिट उपकरण और अन्य तकनीक शामिल थे, जिनकी बिक्री ब्रिटेन और अमेरिका ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के तहत रोकी थी.
HAL ने नहीं दिया अब तक कोई जवाब
हालांकि, HAL ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि HAL ने इन उपकरणों को रूस के एक हथियार आपूर्तिकर्ता, Rosoboroneexport को भेजा था, जो अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा ब्लैकलिस्टेड है.
इसके अलावा HR Smith कंपनी के वकील निक वॉटसन ने सफाई देते हुए न्यूयार्क टाइम्स को बताया कि यह बिक्री वैध थी और उपकरण "भारतीय खोज और बचाव नेटवर्क" के लिए थे, न कि सैन्य उपयोग के लिए. उन्होंने यह भी दावा किया कि ये उपकरण "जीवन रक्षक ऑपरेशनों में मददगार हैं.
हालांकि, NYT द्वारा परामर्श किए गए कानूनी विशेषज्ञों ने संकेत दिया कि ब्रिटिश कंपनी ने भारतीय कंपनी को सामान बेचने में उचित परिश्रम नहीं किया और संभवत: प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है.