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'औरंगजेब के कब्र की जाएगी सुरक्षा लेकिन...', महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया बड़ा बयान

महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद अब भी गर्मा रहा है, जिसमें राज्य सरकार, दक्षिणपंथी संगठनों और सामाजिक तंत्र के बीच तीव्र विरोध और समर्थन देखा जा रहा है. हालांकि मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन यह विवाद राजनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर और भी बढ़ सकता है.

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Edited By: Mayank Tiwari
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
Courtesy: X@Dev_Fadnavis

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार (31 मार्च) को छत्रपति संभाजी नगर जिले में मुगल सम्राट औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को नकारते हुए इसे "संरक्षित स्मारक" बताया है. इस दौरान उन्होंने साफ किया कि वह औरंगजेब की महिमामंडन करने की अनुमति नहीं देंगे.

"औरंगजेब की कब्र एक संरक्षित स्मारक है"

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "चाहे हम औरंगजेब को पसंद करें या न करें, उसकी कब्र एक संरक्षित स्मारक है. हम किसी को भी उसे महिमामंडित करने की अनुमति नहीं देंगे." इस बयान के बाद, उन्होंने इस मुद्दे पर अपने कड़े रुख को साफ किया, जबकि औरंगजेब की कब्र को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद जारी है.

जानिए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने क्या रखी मांग?

इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने भी औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग की. इसके साथ ही इसकी जगह पर छत्रपति संभाजी महाराज के लिए एक भव्य स्मारक बनाने का सुझाव दिया. केंद्रीय मंत्री आठवले का यह बयान उस समय आया जब दक्षिणपंथी संगठन इस मुद्दे पर अधिक सक्रिय हो गए हैं.

VHP और बजरंग दल ने जताया विरोध

विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने छत्रपति संभाजी नगर में मुग़ल सम्राट औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है. इन संगठनों ने मराठवाड़ा और अन्य जिलों में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित किए हैं. इन संगठनों का कहना है कि यदि राज्य सरकार इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं करती है, तो वे इसे स्वयं नष्ट कर देंगे.

औरंगजेब की कब्र को लेकर नागपुर में फैला तनाव

इस महीने की शुरुआत में नागपुर में स्थितियां और अधिक तनावपूर्ण हो गईं हैं. जब यह अफवाहें फैलीं कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक चादर को जलाया गया, जिसमें पवित्र लेख लिखे गए थे. इस अफवाह ने हिंसक झड़पों को जन्म दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया.