Kejriwal Government Bungalow: दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे अब साफ हो चुके हैं और यह तय हो गया है कि 27 साल बाद दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार बनाने जा रही है. लेकिन इस हार के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपने सरकारी बंगले से कब तक बाहर निकलना होगा? इस सवाल के जवाब में हम आपको बताने जा रहे हैं दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित नियम और जुर्माने के बारे मेंकब खाली करना होगा सरकारी बंगला?
दिल्ली विधानसभा चुनाव में हारने वाले नेताओं को सरकारी बंगला खाली करना होता है, लेकिन इसके लिए एक तय समय सीमा होती है. जानकारी के अनुसार, चुनाव परिणाम के बाद हारने वाले विधायकों को लोक निर्माण विभाग (PWD) से एक नोटिस भेजा जाता है. इस नोटिस के मिलने के बाद, विधायकों को 1 महीने के अंदर अपना सरकारी आवास खाली करना होता है. अगर वे तय समय में बंगला खाली नहीं करते हैं तो उन्हें जुर्माना भुगतना पड़ सकता है.
इस नियम के तहत अगर हारने वाले विधायक सरकारी बंगला समय पर नहीं खाली करते, तो उन पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला जा सकता है. 2019 में मोदी सरकार ने एक कानून लागू किया था जिसके तहत नेताओं को तय समय में सरकारी बंगला खाली करना अनिवार्य किया गया. इस नियम का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ बंगला खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.
आपको यह भी जानकर अच्छा लगेगा कि दिल्ली में केवल सरकारी बंगला ही नहीं, बल्कि पूर्व विधायकों को पेंशन और अन्य भत्ते भी दिए जाते हैं. दिल्ली में पूर्व विधायकों को हर महीने 30,000 रुपये की पेंशन दी जाती है. अगर कोई विधायक एक से अधिक बार विधायक रह चुका है, तो उसकी पेंशन में प्रत्येक कार्यकाल के लिए 1,000 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जाती है. इसके अलावा, अगर किसी पूर्व विधायक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है.
यह साफ है कि दिल्ली में हारने वाले विधायकों को निर्धारित समय सीमा के अंदर अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़ता है, और अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इस नियम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सरकारी आवासों का सही तरीके से उपयोग हो और नेताओं को उनके कार्यकाल के बाद इनका कब्जा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा सके.