PM Modi Mann Ki Baat 120th Eposode: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' के 120वें एपिसोड में देशवासियों को चैत्र नवरात्रि, उगादि, गुड़ी पड़वा, विषु पर्व और भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएं दीं. इस मौके पर उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता को सराहते हुए कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से नववर्ष मनाने की परंपरा हमारे देश की एकता में विविधता को दर्शाती है.
भारतीय नववर्ष का शुभारंभ
पीएम मोदी ने कहा, ''आज चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा है और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. इसी के साथ विक्रम संवत 2082 का भी शुभारंभ हो रहा है.'' उन्होंने बताया कि उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों से ढेरों चिट्ठियां और संदेश मिले हैं, जिनमें लोगों ने अपनी शुभकामनाएं और भावनाएं साझा की हैं. उन्होंने कहा कि यह दिन सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और देशभर में नववर्ष का उत्साह देखने को मिल रहा है.
विभिन्न भाषाओं में नववर्ष की शुभकामनाएं
पीएम मोदी ने भारत की भाषाई विविधता को दर्शाते हुए अलग-अलग भाषाओं में नववर्ष की बधाइयां दीं. उन्होंने कन्नड़ और तेलुगु में उगादि, कोंकणी में संसार पाड़वा, मराठी में गुड़ी पड़वा, मलयालम में विषु पर्व और तमिल में पुथांडु की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा, ''हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से नववर्ष मनाया जाता है, लेकिन इन सभी त्योहारों का उद्देश्य एक ही है - आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देना.''
त्योहारों की धूम और उत्साह
बता दें कि पीएम मोदी ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उगादि, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और कश्मीर में नवरेह जैसे त्योहारों का विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों में असम में 'रोंगाली बिहू', बंगाल में 'पोइला बोइशाख' और अन्य राज्यों में भी नववर्ष के त्योहार मनाए जाएंगे. उन्होंने कहा, ''भारत का हर त्योहार हमारी संस्कृति की समृद्धि और विविधता को दर्शाता है. 13 से 15 अप्रैल के बीच पूरे देश में त्योहारों की जबरदस्त धूम देखने को मिलेगी.''
ईद और भारतीय संस्कृति की एकता
वहीं पीएम मोदी ने आगामी ईद के त्योहार का भी जिक्र किया और कहा कि यह महीना त्योहारों और पर्वों से भरा हुआ है. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे सांस्कृतिक एकता को बनाए रखें और उत्सवों को प्रेम और सौहार्द के साथ मनाएं. उन्होंने कहा, ''हमारे त्योहार भले ही अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाए जाते हैं, लेकिन इनका सार एक ही है - पूरे समाज को जोड़ना और खुशियां बांटना. हमें इस एकता की भावना को मजबूत करते रहना चाहिए.''