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'फर्जी' दिव्यांग सर्टिफिकेट, रुतबे की चाहत, आखिर कौन हैं IAS पूजा खेड़कर?

पूजा खेडकर ने अपने गाड़ी में लाल-नीली बत्ती, लेटर पैड, नेमप्लेट, अलग कार्यालय और उनके बुलावे पर एक पर्सनल कर्मचारी की मांग की है. हालांकि पूजा खेडकर इन विशेषाधिकारों की हकदार नहीं है, फिर भी वे अपनी मांगों से चर्चा में बनी हुई हैं. पूजा खेडकर 2022 बैच की आईएएस ट्रेनी अधिकारी हैं. बताया जाता है कि यूपीएससी परीक्षा में उन्हें 821वीं रैंक (पीडब्ल्यूडी-5) मिली है.

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महाराष्ट्र सरकार ने आईएएस प्रोबेशनर डॉ पूजा खेडकर को पुणे से वाशिम ट्रांसफर करने का फैसला किया है. यह आदेश प्रशासन को उनके खिलाफ कई शिकायतें मिलने के बाद आया है. महाराष्ट्र सरकार के सहायक सचिव एसएम महादिक द्वारा हस्ताक्षरित सरकारी आदेश में इस ट्रांसफर के लिए प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया है. पूजा खेडकर एक परिवीक्षाधीन अधिकारी हैं, पिछले दो महीनों से ऐसी मांगें और विशेषाधिकार मांग रही थीं जो किसी ट्रेनी को नहीं दिए जाते. 

पूजा खेडकर ने अपने गाड़ी में लाल-नीली बत्ती, लेटर पैड, नेमप्लेट, अलग कार्यालय और उनके बुलावे पर एक समर्पित कर्मचारी की मांग की है. हालांकि पूजा खेडकर इन विशेषाधिकारों की हकदार नहीं है, फिर भी वे अपनी मांगों से चर्चा में बनी हुई हैं. 

आरोप है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) में सेवानिवृत्त अधिकारी पिता दिलीपराव खेडकर अपनी बेटी की मांगों को पूरा करने के लिए कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे थे. पूजा खेडकर ने कथित तौर पर अपने निजी वाहन पर लाल-नीली बत्ती का इस्तेमाल किया था, जिसकी तस्वीर वायरल होने के बाद यह घटना सुर्खियों में आई थी. इसके अलावा यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि उसने अतिरिक्त जिला कलेक्टर अजय मोरे की जानकारी के बिना उनके पूर्व कक्ष पर भी कब्जा कर लिया होगा.

पूजा खेडकर कौन हैं?

पूजा खेडकर 2022 बैच की आईएएस ट्रेनी अधिकारी हैं. बताया जाता है कि यूपीएससी परीक्षा में उन्हें 821वीं रैंक (पीडब्ल्यूडी-5) मिली है. वह पुणे में सहायक कलेक्टर के पद पर तैनात थीं, लेकिन अब उनका तबादला वाशिम कर दिया गया है. उनके पिता के साथ-साथ पूजा खेडकर के दादा भी सिविल सर्विसेस थे. उनकी मां अहमदनगर जिले के पाथर्डी तालुका के भालगांव की निर्वाचित सरपंच हैं. 

प्रशासनिक सेवा में प्रवेश के साथ-साथ नियुक्ति के संदिग्ध तरीके के कारण वह इंटरनेट पर छाई हुई हैं. 2 फरवरी, 2022 को पूजा खेडकर को नियुक्ति देने से मना कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि वह दृष्टिहीन और मानसिक रूप से बीमार हैं. कोर्ट ने जुलाई से सितंबर 2022 के बीच चार बार उनकी मेडिकल जांच निर्धारित की. वह चारों बार उपस्थित नहीं हुईं और इसलिए ट्रिब्यूनल ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया. हालांकि, 2023 में, उनका हलफनामा विकलांग अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत प्रस्तुत किया गया और परिणामस्वरूप उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई.