Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर लोकसभा में बहस जारी है. पक्ष-विपक्ष द्वारा लगातार बहस की जा रही है. एक ओर, सरकार ने इस संशोधन के पीछे महिलाओं और सभी कमजोरों के साथ न्याय का उद्देश्य बताया गया है. वहीं, विपक्षी पार्टियों द्वारा इस विधेयक के पीछे अल्पसंख्यक समुदाय को कमजोर करने, बदनाम करने, विभाजित करने और वंचित करने का उद्देश्य बताया गया है.
विधेयक पर विरोध जताते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह विधेयक केवल प्रशासनिक बदलावों के बारे में नहीं है. इसे संविधान को कमजोर करने, अल्पसंख्यक समुदायों को बदनाम करने, भारतीय समाज को विभाजित करने और अल्पसंख्यकों को वंचित करने की कोशिश बताई गई है.
चर्चा के दौरान इस विधेयक के विरोध में बोलते हुए उन्होंने सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि आज उनकी नजर एक समुदाय की जमीन पर है, कल यह किसी और की होगी. उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू पर सदन में यूपीए सरकार के बारे में जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया. रिजिजू ने इस बिल को पेश करते हुए कहा कि कैसे यूपीए सरकार ने इस कानून को अन्य कानूनों पर हावी कर दिया, जिसकी वजह से इसमें नए संशोधनों की आवश्यकता पड़ी. उन्होंने कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आपने उन मुद्दों पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जो वक्फ विधेयक का हिस्सा नहीं हैं. रिजिजू ने संबोधन देते हुए कहा कि सरकार किसी भी धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप नहीं करने जा रही है.
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने इस विधेयक को भाजपा द्वारा अपनी कमियों को छिपाने की चाल करार दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए बार-बार ऐसे विधेयक लाती है. हमने देखा है कि संभल में प्रशासनिक अधिकारी क्या कर रहे थे. अपनी कमियों को छिपाने के लिए भाजपा ऐसे विधेयक लाती रहती है. वक्फ विधेयक का इस्तेमाल अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए किया जा रहा है. प्रस्तावित विधेयक 2013 से पहले के नियमों को बहाल करता है. बदलाव के तहत बोर्ड के फैसले को अदालत में चुनौती का अधिकार मिलता है. इसके अलावा, वक्फ बोर्ड में दो महिलाओं और अन्य धर्मों के दो सदस्यों को शामिल करने की इजाजत दी गई है.