menu-icon
India Daily

च्विंगम चबाने की आपको भी है गंदी लत? नर्वस सिस्टम का ऐसा करे देगा हाल, दांत से लेकर आंत तक सबका हो जाएगा काम तमाम!

च्युइंग गम के रुप में अनजाने में हज़ारों छोटे प्लास्टिक के टुकड़े निगल रहे हैं. माइक्रोप्लास्टिक्स में शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करने की क्षमता होती है. मस्तिष्क की सूजन अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जुड़ी हुई है. जिसके अनुसार हर ग्राम गम से 100 माइक्रोप्लास्टिक निकलते हैं. गम का टुकड़ा बड़ा है, तो यह हमारे मुंह में 1,000 से अधिक माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकता है.

auth-image
Edited By: Reepu Kumari
Impact of chewing gum on health
Courtesy: Pinterest

Impact of chewing gum on health: च्युइंग गम चबाने की आज कल तो लोगों की जैसे आदत सी हो गई है. ताजी सांस के लिए तो अपने चिन को कम करने के लिए वो चबाते हैं. अगर आपको भी अच्छा लगता है तो सावधान हो जाएं. ये आपके नर्वस सिस्टम को सीधे निशाना बनाता है. एक रिसर्च में दावा किया गया है च्युइंग गम चबाना शरीर के लिए कितना खतरनाक है. असल में हम च्युइंग गम के रुप में अनजाने में हज़ारों छोटे प्लास्टिक के टुकड़े निगल रहे हैं. 
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स (UCLA) ने हाल ही में एक रिसर्च रिपोर्ट को पेश किया.

रिसर्च में दावा है कि च्युइंग गम चबाने के साथ, आप अनजाने में हज़ारों छोटे प्लास्टिक के टुकड़े निगल रहे हैं. ये माइक्रोप्लास्टिक आपके तंत्रिका तंत्र (Nervous system) को प्रभावित कर सकते हैं. 

लार के साथ मिल जाते हैं छोटे प्लास्टिक के टुकड़े

आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के न्यूरो सर्जरी और साइबरनाइफ के निदेशक डॉ. आदित्य गुप्ता कहते हैं 'पेड़ों के रस पर आधारित मूल गम के विपरीत, आधुनिक गम बेस वस्तुत प्लास्टिक है. आजकल ज्यादातर च्युइंग गम में पॉलीइथिलीन और पॉलीविनाइल एसीटेट जैसे सिंथेटिक पॉलिमर होते हैं. जो अक्सर प्लास्टिक की थैलियों और गोंद में इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थ होते हैं. जब आप चबाते हैं, तो घर्षण और लार धीरे-धीरे गम की सतह को विघटित करते हैं, जिससे हजारों छोटे प्लास्टिक कण आपके मुंह में चले जाते हैं. ये कण लार के साथ मिल जाते हैं और या तो निगल लिए जाते हैं या शरीर द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं.' 

माइक्रोप्लास्टिक पर रिसर्च

हालांकि इस समय गम में माइक्रोप्लास्टिक पर रिसर्च कम हैं. लेकिन माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क के अन्य स्रोतों के अध्ययन से संकेत मिलता है. मस्तिष्क स्वास्थ्य जोखिम में हो सकता है. माइक्रोप्लास्टिक कण आंत की परत जैसी जैविक बाधाओं को भेदने के लिए जाने जाते हैं. कुछ मामलों में, रक्त-मस्तिष्क बाधा को भी. यह गंभीर मामला है क्योंकि वे तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

रिसर्च ने बढ़ाई टेंशन

रिसर्च, जो वर्तमान में सहकर्मी समीक्षा के अधीन है. जिसके अनुसार हर ग्राम गम से 100 माइक्रोप्लास्टिक निकलते हैं. कुछ उत्पादों में प्रति ग्राम 600 माइक्रोप्लास्टिक तक निकलते हैं. इसलिए अगर गम का टुकड़ा बड़ा है, तो यह हमारे मुंह में 1,000 से अधिक माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकता है. जिसे हम निगल सकते हैं. इसलिए चिंता है.

माइक्रोप्लास्टिक ब्रेन पर कैसे डालता है असर?

माइक्रोप्लास्टिक्स में शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करने की क्षमता होती है. परिणामस्वरूप लंबे समय तक सूजन होती है. मस्तिष्क की सूजन अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जुड़ी हुई है. माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने से ऑक्सीडेटिव तनाव भी बढ़ सकता है. एक ऐसी प्रक्रिया जो तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है. मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करती है. यह समय के साथ मानसिक कार्यों को खराब कर सकता है और तंत्रिका संबंधी विकारों को ट्रिगर कर सकता है.

कुछ प्लास्टिक के टुकड़े अंतःस्रावी तंत्र को बाधित करते हैं, जो मस्तिष्क के कार्य-विनियमन करने वाले हार्मोन में बाधा डालते हैं. यह मूड, अनुभूति और यहां तक कि स्मृति को भी प्रभावित कर सकता है. हालांकि गम से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक के दीर्घकालिक परिणाम अच्छी तरह से ज्ञात नहीं हैं, लेकिन कई स्रोतों से बार-बार संपर्क मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है.