Sky Force Movie Review: अक्षय कुमार ने 2025 में अपनी पहली फिल्म स्काई फोर्स के जरिए फिर से वर्दी पहनकर भारतीय सिनेमा में एक और अहम किरदार अदा की है. यह फिल्म 1965 के भारत-पाकिस्तान हवाई युद्ध के बारे में है, जो पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस पर भारतीय हवाई हमले से संबंधित है. फिल्म न केवल उस ऐतिहासिक हवाई हमले को दिखाती है, बल्कि भारतीय वायुसेना के वीर जवानों की बहादुरी को भी सम्मानित करती है.
स्काई फोर्स की कहानी 1971 से शुरू होती है, जब पाकिस्तान वायुसेना भारत के एयरबेस पर हमला करती है. इसके जवाब में, भारतीय सेना पाकिस्तानी पायलट अहमद हुसैन (शरद केलकर) को पकड़ लेती है. विंग कमांडर केओ आहूजा (अक्षय कुमार) अहमद से पूछताछ करते हैं और उसे पता चलता है कि अहमद को 1965 के सरगोधा हमले के बाद सम्मानित किया गया था. यह आहूजा का शक उत्पन्न करता है और उन्हें पहला सुराग मिलता है. कहानी में फ्लैशबैक के माध्यम से हम 1965 के युद्ध में जाते हैं, जहां आहूजा आदमपुर एयरबेस पर तैनात होते हैं और अपने जवानों को युद्ध की तैयारियां कराते हैं. इनमें से एक जवान विजया (वीर पहाड़िया) होता है, जो जोश से भरा हुआ और विद्रोही स्वभाव का होता है.
इसके बाद, पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरबेस पर हमला करने के बाद, आहूजा अपने साथियों के साथ मिशन की योजना बनाते हैं, जिसमें विजया की शहादत होती है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे 23 साल बाद विजया के परिवार के साथ क्या होता है और यह आहूजा के लिए एक व्यक्तिगत संघर्ष बन जाता है.
डायरेक्शन अभिषेक अनिल कपूर और संदीप केवलानी ने एक सशक्त और दिलचस्प कहानी पेश की है, जो वास्तविक घटनाओं पर आधारित है. इस फिल्म का लेखन प्रभावी है, और यह दर्शकों को अपनी सीटों से जोड़े रखने में सफल है. हालांकि, कुछ जगहों पर वीएफएक्स की गुणवत्ता में कमी महसूस होती है, विशेष रूप से शुरुआती हवाई दृश्यों में. हालांकि, हवाई युद्ध के सीन काफी प्रभावशाली हैं, लेकिन वे हॉलीवुड स्तर के नहीं हैं. फिल्म का रनटाइम 125 मिनट है, और इसका प्रवाह बखूबी बनाए रखा गया है. सिनेमेटोग्राफी बेहतरीन है, विशेषकर एयरबेस हमले के दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं.
अक्षय कुमार ने विंग कमांडर केओ आहूजा के रूप में शानदार अभिनय किया है. उनके अभिनय में गंभीरता और उत्साह का मिश्रण है, जो इस फिल्म में उनके किरदार को जीवंत बनाता है. उनके संवाद और दृश्यों में जोश से भरपूर ऊर्जा नजर आती है. अक्षय और उनकी पत्नी के रूप में निमरत कौर की केमिस्ट्री भी बेहद सजीव और प्रभावशाली है. दोनों के बीच की भावनात्मक गहराई दर्शकों को छूती है.
वीर पहाड़िया का अभिनय संतोषजनक है, उनके किरदार में जोश और जुनून भरपूर देखा गया है. उनका प्रदर्शन अक्षय कुमार के सामने फीका पड़ जाता है, जो फिल्म की ऊर्जा को प्रभावित करता है. दूसरी ओर, सारा अली खान के अभिनय ने एक बार फिर निराश किया है. वे अपने किरदार में ढलने में असफल रही हैं और उनके अभिनय में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा. शरद केलकर ने पाकिस्तानी अफसर के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया है और कुछ दृश्यों में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है.