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कौन राहुल गांधी? चुनाव में चुनौती देकर दिया जवाब, अब वायरल हो रहे ये वीडियो

राहुल गांधी की राजनीतिक समझ के बारे में बीजेपी सवाल उठाती रही है. उनके राजनीतिक अस्तित्व को बीजेपी हमेशा चुनौती देते रही है. 10 सालों के मेहनत के बाद एक बार फिर राहुल गांधी ने साबित कर दिया है कि वे विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे हैं, जिसके इशारे पर सरकार तक गिर सकती है.

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Edited By: India Daily Live
Rahul Gandhi
Courtesy: Social Media

जिस राहुल गांधी को ट्रोल्स 'पप्पू' बता रहे थे, उन्होंने एक बार फिर साबित कर लिया कि मौन मुस्कान की मार, विरोधियों की चूलें हिलाने के लिए काफी होती है. जिस राहुल गांधी के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर स्मृति ईरानी तक कह चुके हैं 'कौन', उसी राहुल गांधी ने बीजेपी को ऐसा कष्ट दिया है, जिससे उबरने में कई साल लगेंगे. राहुल गांधी ने बता दिया है वे 'कौन' हैं. इंडिया ब्लॉक की सारी पार्टियां, आज कांग्रेस के 'छत्र' तले झुकने को मजबूर हैं और वे विपक्ष के 'सम्राट' जैसे नजर आ रहे हैं.

जो कांग्रेस 55 से भी कम सीटों पर 2019 में सिमट चुकी हू, जो कांग्रेस 2014 में 44 सीटें हासिल कर पाई हो, उसकी कांग्रेस ने राहुल गांधी की नेतृत्व में खुद को साबित कर दिया है कि कांग्रेस मुक्त भारत का सपना कभी पूरा नहीं होगा. देश की राजनीति में जब-जब लगता है कि राहुल गांधी अप्रासंगिक हो रहे हैं, वे बार-बार उभरकर सामने आ जाते हैं.


कौन राहुल गांधी? जान लीजिए हैं कौन

साल 2019 का लोकसभा चुनाव. अमेठी की लोकसभा सीट. बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को इस लोकसभा सीट हार के बाद भी दोबारा भरोसा जताया. स्मृति ईरानी की 5 साल की मेहनत रंग लाई और राहुल गांधी बुरी तरह हारे. 2024 में राहुल गांधी ने अपने परिवार के भरोसेमंद केएल शर्मा को उतार दिया. उन्होंने स्मृति ईरानी को 1 लाख 67 हजार वोटों से हरा दिया. यह स्मृति ईरानी की बड़ी हार थी. उन्होंने भी कई बार कहा था कि 'कौन राहुल गांधी', उसी कौन के एक प्यादे से स्मृति ईरानी हार गईं, वह भी तब, जब वे केंद्रीय मंत्री हैं.

क्या है राहुल गांधी की ताकत?

भारत जोड़ो यात्रा 2.O के बाद राहुल गांधी का सियासी कद अचानक बढ़ गया. लोकसभा चुनाव के जब नतीजे आए तो कांग्रेस 99 सीटों पर आ गई. यह एक बड़ा उछाल था. जिस कांग्रेस को लोग यूपी से खत्म मान रहे थे, वही कांग्रेस 6 सीटों पर काबिज हो गई. इंडिया गठबंधन को एकजुट करने का श्रेय भी कांग्रेस को गया. लोग कह रहे थे कि यह एक नेतृत्वहीन गठबंधन है, पर लगभग पर विपक्षी दल ने अलिखित तौर पर मान लिया कि कांग्रेस ही तय करेगी कि विपक्ष का एजेंडा क्या होगा.

इन राज्यों में नहीं खुलने दिया बीजेपी का खाता

राहुल गांधी की ताकत आप ऐसे समझ लीजिए कि तमिलनाडु, पंजाब, सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम
नगालैंड जैसे राज्यों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुलने दिया. कांग्रेस की मौजूदगी की वजह से केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप में भी बीजेपी का खाता नहीं खुला. वोट शेयर भी घट गया.

राहुल गांधी ने पहले कह दिया था क्या होगा बीजेपी का अंजाम

राहुल गांधी ने संसद भवन से कहा था कि तमिलनाडु में आपको कुछ नहीं मिलेगा. आप कभी भी नहीं वहां अपनी जड़ें जमा सकोगे. राहुल गांधी ने कहा था कि यूपी आपको सबसे बड़ा झटका देगी. राहुल गांधी ने 400 पार नारे को खारिज किया था और यह भी कहा था कि आपको बहुमत नहीं मिलेगा. राहुल गांधी की ही एक-एक बात सच हुई और बीजेपी का प्रदर्शन बहुत बुरा रहा. 

 


चाहें तो सरकार गिरा दें राहुल गांधी!

बीजेपी के पास अकेले बहुमत भी नहीं है. बीजेपी के पास कुल सीटें 240 हैं. जेडीयू के पास 12 और टीडीपी के पास 16 सीटें हैं. बीजेपी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है. नीतीश कुमार बिहार में इतनी बार पलट चुके हैं कि उन्हें उनके विरोधी पलटू राम कहते हैं. वे कब बीजेपी को छोड़कर इंडिया गठबंधन में चले जाएं, कब इंडिया गठबंधन को छोड़कर एनडीए में आ जाएं, यह उनके करीबी भी नहीं जानते हैं.

सियासी जानकार कहते हैं कि नीतीश की राजनीति और बीजेपी की राजनीति में जमीन और आसमान का अंतर है. बीजेपी हिंदुत्व पर खेलती है, नीतीश सेक्युलर विचारधारा के हैं. टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू भी इस मिजाज के नहीं हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस अच्छा ऑफर दे तो ये दल उसके साथ जा सकते हैं. अब अगर राहुल गांधी दोनों नेताओं को लुभाने में कामयाब हो जाते हैं तो वे सत्ता में भी आ सकते हैं. अभी तो इंडिया गठबंधन ने कहा है कि सही समय पर सरकार में आएंगे.