लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए अच्छे नहीं रहे. साल 2014 से लेकर 2019 तक, जिस प्रचंड बहुमत की ठसक के साथ नरेंद्र मोदी ने सरकार चलाई थी, वह इस बार नहीं होने वाला है. सहयोगी दलों ने अभी से ही इशारा कर दिया है कि उनकी मंशा नहीं है कि वे बीजेपी के हर फैसलों पर साथ देंगे. जातिगत जनगणना, अग्निवीर, सीएए और एनआरसी पर तो बीजेपी को न जेडीयू का साथ मिलने वाला है, न ही तेलगू देशम पार्टी (TDP) का.
यह दावा मीडिया का नहीं है. खुद जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है, 'अग्निवीर योजना को लेकर मतदाताओं के एक हिस्से में नाराजगी रही है. हमारी पार्टी चाहती है कि विचार से उनक कमियों को और खामियों को दूर किया जाएगा. यूनिफॉर्म सिविल कोड पर पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते विधि आयोग के अध्यक्ष को मुख्यमंत्री चिट्ठी लिख चुके हैं. हम इसके विरुद्ध नहीं हैं. लेकिन जितने भी स्टेक होल्डर्स हैं, चाहे राज्य हों, मुख्यमंत्री हों और तबके हों, उनकी राय से इसका हल निकाला जाना चाहिए.'
नीतीश कुमार जेपी आंदोलन की पृष्टिभूमि से तैयार हुए नेता हैं. वे खांटी समाजवादी हैं. सेक्युलर विचारधारा में भरोसा करते हैं. उनका एक बयान ऐसा नहीं मिलेगा, जिसमें वह हिंदू-मुसलमान करते नजर आए हों. वे मुस्लिमों को भी टिकट देते हैं और पार्टी में प्रतिनिधित्व भी. बीजेपी ने 2024 के चुनाव में खुलकर मुस्लिमों पर सियासत की थी. बीजेपी का कहना था कि कांग्रेस हिंदुओं का हक छीनकर मुसलमानों को संपत्ति बांट देगा, महिलाओं का मंगलसूत्र छीन लेगी. ऐसे तल्ख बयानों से नीतीश कुमार ने हमेशा परहेज किया है. सीएए-एनआरसी बीजेपी का हार्डकोर एजेंडा रहा है. अब नीतीश कुमार की पार्टी ने साफ कर दिया है कि वे सरकार के साथ इस मुद्दे पर बात करेंगे.
#WATCH | JD(U) spokesperson KC Tyagi says, "A section of voters has been upset over the Agniveer scheme. Our party wants those shortcomings which have been questioned by the public to be discussed in detail and removed...On UCC, as the national president of the party, CM had… pic.twitter.com/KBKbmJHXZL
— ANI (@ANI) June 6, 2024
नरेंद्र मोदी सरकार का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है अग्निवीर. अब यह योजना भी खटाई में पड़ती नजर आ रही है. यूपी और बिहार के युवा बड़ी संख्या में सेना में भर्ती होते हैं. सेना की वैकेंसी कम निकालना और अग्निवीरों को उनके विकल्प में इस्तेमाल करना, यह सियासी मुद्दा बन गया है. 4 साल की अस्थाई नौकरी और जान के जोखिम को लेकर कांग्रेस हमेशा हमलावर रही है. नीतीश कुमार ने भी अब इशारा कर दिया है कि इस योजना पर विचार करना होगा. नरेंद्र मोदी सरकार ऐसी परेशानी में पड़ी है कि उसे अपने सहयोगियों की हर बात माननी ही होगी, इसके अलावा पार्टी के पास कोई विकल्प नहीं है.