शिव से अलग हैं शंकर, जानिए क्या है दोनों में अंतर?
Lord Shiva Story: अधिकतर लोगों को भगवान शिव को ही शंकर और महादेव के नाम से जानते हैं. लोगों को लगता है कि शिव और शंकर एक ही हैं, जबकि सच ये हैं कि दोनों ही अलग-अलग हैं. दोनों काफी बड़ा अंतर हैं. इसमें एक परमात्मा हैं तो एक सिर्फ देव हैं. भगवान शिव अलग हैं और शंकर अलग हैं. शंकर खुद भगवान शिव का पूजन करते हैं.
Lord Shiva Story: भगवान शिव और शंकर को अगर आप भी एक मानते हैं तो आप गलत हैं. ये दोनों अलग-अलग हैं. शिव स्वयं परमात्मा हैं और शंकर एक देव हैं. भगवान शंकर को महेश, रुद्र, गंगाधर, भोलेनाथ और गिरीश आदि कई नामों से जानते हैं. भगवान शिव निराकार हैं. उनसे ही तीन देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश निकले हैं. शिव को स्वयं भू बताया गया है. अर्थात् उनकी उत्पत्ति अपने आप हुई है.
भगवान शिव ने सृष्टि की रचना का कार्य ब्रह्मा को सौंपा हैं और पालन का काम भगवान विष्णु को सौंपा हैं और संहार का कार्य भगवान शंकर को सौंपा है. इस प्रकार ये तीनों देव भगवान शिव के ही अंश हैं. भगवान शिव निराकार हैं और वो एक प्रकाश पुंज हैं. जब साधना में शक्ति समाहित हो जाती है तो वह संपूर्ण हो जाता है, जो सदा-सर्वदा विद्यमान होता है.
शिव हैं परमात्मा
वेद-पुराणों के अनुसार शिव ही परमात्मा है और वे ही सर्वोच्च शक्ति हैं. त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश भगवान शिव के ही आधीन होकर अपने कार्यों को करते हैं. शिव पूरे ब्रह्मांड का संचालन करते हैं.
शिवलिंग और मूर्ति रूप में होती है पूजा
भगवान शिव का पूजन एक ज्योति स्वरूप में किया जाता है. इस ज्योति स्वरूप को ही शिवलिंग कहा गया है. वहीं, शंकर शरीरधारी हैं और वे स्वयं शिवलिंग का पूजन करते हैं. मान्यता है कि शंकर सिर पर चंद्रमा और गंगा रखते हैं. इसके साथ ही वे गले में सांप भी डालते हैं. शिव पुराण के अनुसार, एक प्रकाश पुंज से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश की उत्पत्ति हुई थी. शंकर भगवान शिव की शक्ति के ही एक अंश मात्र हैं.
ये हैं शिव के 10 रूप
शिव के 10 रुपों में पहले महाकाल हैं. दूसरे तारा, तीसरे भुवनेश , चौथे षोडेश श्रीविद्येश, पांचवें भैरव, छठवें छिन्नमस्तक, सातवें द्यूमवान, आठवें बगलामुख, नौवें मातंग, दसवें कमल हैं. इन्हीं की शक्तियां 10 महाविद्याएं हैं.
भगवान शंकर के हैं 12 रुद्र
भगवान शंकर के भी कई रूप हैं, जिनको रुद्र कहा गया है. ये कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शंभु, चंड और भव हैं.
ये हैं रुद्र या शंकर के अंशावतार
12 रुद्रों के अलावा रुद्र के अंशावतार दुर्वासा, हनुमान, महेश, वृषभ, पिप्पलाद, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, अवधूतेश्वर, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, ब्रह्माचारी, सुनटनतर्क, द्विज, अश्वत्थामा, किरात और नतेश्वर आदि अवतार हैं.
ये हैं शिव पंचायत के देवता
शिव पंचायत में सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु हैं. शिव स्वयं ही परमात्मा हैं और बाकी सभी शिव के ही अंश हैं.
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