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Maha Shivratri 2025: महाशिवरात्रि पर हुआ था शिव-पार्वती का विवाह, फिर क्यों होती है सिर्फ भोलेनाथ की पूजा?  

महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है, लेकिन इस दिन माता पार्वती की पूजा नहीं होती क्योंकि वह विवाह से पहले कन्या रूप में थीं. भक्तगण इस दिन भोलेनाथ की आराधना कर उनके आशीर्वाद की प्राप्ति करते हैं.  

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Edited By: Babli Rautela
Maha Shivratri 2025
Courtesy: Social Media

Maha Shivratri 2025: आज महाशिवरात्रि है. ये पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. भक्तगण इस दिन व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि इस पावन अवसर पर माता पार्वती की पूजा क्यों नहीं होती?   

महाशिवरात्रि पर क्यों नहीं होती माता पार्वती की पूजा?  

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष पूजा का विधान है, लेकिन माता पार्वती की पूजा नहीं की जाती. इसके पीछे धार्मिक और शास्त्रों में वर्णित कई कारण हैं.  

1. शिवलिंग पूजा का महत्व  

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की प्रतिमा की जगह शिवलिंग की पूजा की जाती है. शिवलिंग, शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है, जबकि शिव प्रतिमा के साथ माता पार्वती का होना जरुरी माना जाता है. इसीलिए, शिवलिंग के रूप में शिव की पूजा की जाती है और माता पार्वती की अलग से आराधना नहीं होती.  

2. माता पार्वती का कन्या स्वरूप  

शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रूप में हासिल किया था. विवाह से पहले वह एक साधारण कन्या थीं, लेकिन विवाह के बाद देवी बन गई थी. महाशिवरात्रि का दिन उनके विवाह से पहले की स्थिति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन पार्वती पूजन मान्य नहीं है.  

3. महादेव का शिवत्व  

भगवान शिव स्वयं आदि और अनंत हैं. वे सनातन देवता हैं और सदैव पूजनीय हैं. माता पार्वती को देवी रूप में स्थापित होने के लिए शिव विवाह का पूर्ण होना आवश्यक था, इसलिए महाशिवरात्रि पर केवल भगवान शिव की पूजा होती है.  

कैसे करें महाशिवरात्रि पर शिवजी की पूजा?  

महाशिवरात्रि पर शिव की पूजा करने के लिए प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद शिवलिंग का जल, दूध, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें. बेलपत्र, धतूरा, भांग और अक्षत अर्पित करें और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. इसके अलावा भोलेनाथ को खुश करने के लिए आप रात्रि जागरण और शिवपुराण का पाठ भी कर सकते हैं.