Gupt Navratri of Ashadh Month: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. इनमें से दो नवरात्रि - चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि - प्रसिद्ध हैं, जबकि दो नवरात्रि - गुप्त नवरात्रि - कम ज्ञात हैं. आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 6 जुलाई से शुरू होकर 14 जुलाई तक चलेगी.
गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि इस दौरान देवी दुर्गा अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं. गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की दस महाविद्याओं - त्रिपुरा सुंदरी, त्रिपुर भैरवी, भगवती भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, धूम्रवती, बगलामुखी, महालक्ष्मी, कमला, मातंगी और त्रिपुर भैरवी - की पूजा की जाती है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में कुछ राशियों पर माता रानी की विशेष कृपा रहेगी.
वृषभ राशि:
मिथुन राशि:
सिंह राशि:
धनु राशि:
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें. प्रतिमा को स्नान कराकर, वस्त्र, आभूषण और फूलों से सजाएं. देवी के समक्ष दीप, नैवेद्य और धूप अर्पित करें. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या देवी के मंत्रों का जाप करें.
नौ दिनों तक व्रत रखें और सात्विक भोजन करें. नवरात्रि के नौ दिन शुभ कार्यों और सकारात्मक विचारों में बिताएं. गुप्त नवरात्रि के दौरान दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है. अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें.
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ज्योतिषीय भविष्यवाणियां सिर्फ संभावनाओं को बताती हैं. इन पर पूरी तरह निर्भर न रहें. गुप्त नवरात्रि का असली लाभ सच्ची श्रद्धा और पूजा-पाठ से प्राप्त होता है. इस दौरान साधना करें, मन को शुद्ध रखें और सकारात्मक सोच के साथ माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करें.